इंदौर में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन का तीसरा दिन: खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और किसानों की आय बढ़ाने पर वैश्विक मंथन

11 Jun 2026 22:54:53
इंदौर में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन का तीसरा दिन


- 20 देशों के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और नीति विशेषज्ञ कर रहे सहभागिता, मध्य प्रदेश को वैश्विक कृषि मंच पर मिल रही नई पहचान

इंदौर, 11 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों वैश्विक कृषि कूटनीति का केंद्र बना हुआ है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के तीसरे दिन गुरुवार को खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि, किसानों की आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ-साथ सहयोगी राष्ट्रों सहित करीब 20 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्माता और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान संयुक्त घोषणा-पत्र (जॉइंट डिक्लेरेशन) के मसौदे पर पहला चरण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे चरण की चर्चा जारी है। शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होटल मेरियट में विदेशी प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में विशेष रात्रिभोज का आयोजन करेंगे, जहां कृषि सहयोग और निवेश संभावनाओं पर अनौपचारिक संवाद भी होगा।

वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति पर जोर

सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य दुनिया के सामने उभर रही खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों का समाधान तलाशना और कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाना है। विशेषज्ञों ने कहा कि बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बीच खाद्य उत्पादन को टिकाऊ बनाए रखना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती होगी। प्रतिनिधियों ने कृषि उत्पादन बढ़ाने, खाद्य हानि कम करने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के उपायों पर अपने अनुभव साझा किए। कई देशों ने अपने सफल कृषि मॉडल और तकनीकी नवाचारों की जानकारी भी प्रस्तुत की।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए तकनीक और बाजार पर चर्चा

सम्मेलन में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण सुविधाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना भी जरूरी है। ड्रोन तकनीक, प्रिसिजन फार्मिंग, स्मार्ट कृषि, ई-मार्केटिंग और डिजिटल एग्रीकल्चर जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित खेती से उत्पादन लागत कम होगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकेगी।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों पर गंभीर विमर्श

जलवायु परिवर्तन का कृषि क्षेत्र पर पड़ रहे प्रभाव को सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल किया गया है। अनियमित मानसून, सूखा, बाढ़ और बढ़ते तापमान के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसी संदर्भ में ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ और ‘सस्टेनेबल फार्मिंग’ पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने के उपायों पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाना अनिवार्य होगा।

कृषि व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति

सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के बीच कृषि व्यापार को बढ़ावा देने और कृषि अनुसंधान में साझेदारी मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों ने कृषि उत्पादों के निर्यात-आयात को सुगम बनाने, उन्नत बीज तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत कृषि साझेदारी वैश्विक खाद्य प्रणाली को अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाने में मददगार साबित होगी।

12 जून को होगा कृषि मंत्रियों का विशेष संवाद

सम्मेलन के चौथे दिन 12 जून, शुक्रवार को कृषि मंत्रियों का विशेष संवाद आयोजित किया जाएगा। इसका विषय “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा रखा गया है। इस सत्र में छोटे किसानों की चुनौतियों, कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर, डिजिटल कृषि तकनीकों के उपयोग तथा जलवायु अनुकूल खेती के मॉडलों पर विचार-विमर्श होगा।

13 जून को होगी ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक

सम्मेलन के अंतिम दिन 13 जून को ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित होगी। इसमें कृषि सहयोग को नई दिशा देने, खाद्य हानि कम करने, कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजने पर चर्चा की जाएगी। बैठक के समापन पर एक महत्वपूर्ण साझा दस्तावेज जारी किए जाने की संभावना है, जिसमें सदस्य देशों की सहमति से तैयार सिफारिशें और भविष्य की कार्ययोजना शामिल होगी।

‘ब्रिक्स वाटिका’ देगी पर्यावरण संरक्षण का संदेश

सम्मेलन के दौरान पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने के लिए विशेष ‘ब्रिक्स वाटिका’ विकसित की जाएगी। इस पहल के तहत सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सामूहिक पौधारोपण करेंगे। आयोजकों के अनुसार यह वाटिका प्रकृति संरक्षण, हरित विकास और वैश्विक सहयोग का प्रतीक बनेगी तथा आने वाले वर्षों तक ब्रिक्स देशों की साझा पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाएगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

Powered By Sangraha 9.0