केंद्र सरकार ने पेट्रोल पंपों से थोक औद्योगिक पेट्रोल-डीजल की खरीद पर लगाई रोक

12 Jun 2026 14:19:53
पेट्रोल पंप के लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 12 जून (हि.स.)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन आपूर्ति को लेकर संभावित चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम उठाया है। सरकार ने औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल-डीजल की खरीद पर अस्थायी रोक लगा दी है। अब ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत का ईंधन थोक बिक्री केंद्रों अथवा निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ही लेना होगा।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को ‘मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026’ जारी किया है। इस आदेश के तहत खुदरा पेट्रोल पंपों से थोक स्तर पर ईंधन खरीदने पर अधिकतम 90 दिनों तक रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय देशभर में पेट्रोल और डीजल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी की आशंका को रोकने और निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रों में, विशेषकर डीजल की मांग में असामान्य वृद्धि देखी गई है। कीमतों में अंतर का लाभ उठाने के लिए कई थोक उपभोक्ताओं ने थोक बिक्री केंद्रों के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदना शुरू कर दिया था। इससे खुदरा आपूर्ति प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई थी।

नए नियमों के तहत औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और संस्थागत उपभोक्ताओं को अब पेट्रोल पंपों से सीधे ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें अधिकृत थोक आपूर्ति चैनलों अथवा अपने उपभोक्ता पंपों के माध्यम से ही ईंधन प्राप्त करना होगा।

सरकार के इस निर्णय के पीछे खुदरा और थोक कीमतों के बीच का बड़ा अंतर भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। उदाहरण के तौर पर नई दिल्ली में खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक बिक्री के लिए इसकी कीमत 134.50 रुपये प्रति लीटर है। इस मूल्य अंतर के कारण कई उपभोक्ता थोक आवश्यकता होने के बावजूद खुदरा पंपों से ईंधन खरीदने लगे थे। नतीजतन, निजी क्षेत्र के थोक बिक्री केंद्रों की बिक्री प्रभावित हुई और मांग का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के खुदरा नेटवर्क की ओर स्थानांतरित हो गया।

सरकार का मानना है कि यदि खुदरा आउटलेट्स से बड़े पैमाने पर ईंधन की खरीद जारी रहती है तो स्थानीय स्तर पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे परिवहन सेवाओं, आवश्यक आपूर्ति श्रृंखलाओं और आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए यह अस्थायी प्रतिबंध लागू किया गया है।

आदेश के अनुसार यह व्यवस्था प्रारंभिक तौर पर 90 दिनों तक प्रभावी रहेगी। हालांकि परिस्थितियों और मांग-आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के बाद इसकी अवधि बढ़ाने का निर्णय भी लिया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि मई महीने में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की पेट्रोल बिक्री में 4.8 प्रतिशत तथा डीजल बिक्री में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े देश में ईंधन की बढ़ती मांग और उपभोग के रुझान को भी दर्शाते हैं।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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