
काठमांडू, 12 जून (हि.स.)। नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने सरकार द्वारा ट्रेड यूनियनों को भंग करने के निर्णय पर लगाई गई अंतरिम रोक को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही सरकार को अपने फैसले को लागू करने का कानूनी आधार मिल गया है। शुक्रवार को आए इस फैसले के बाद सरकार अब सरकारी निकायों में संचालित ट्रेड यूनियनों को भंग करने संबंधी अपने निर्णय को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगी।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार शर्मा की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया। सरकार के निर्णय के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई 3 जून से शुरू हुई थी और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
इससे पहले तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल की अध्यक्षता वाली एक अन्य संवैधानिक पीठ ने बहुमत के आधार पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए सरकार को अपने निर्णय को लागू न करने का निर्देश दिया था।
हालांकि उस समय न्यायाधीश बिनोद शर्मा और शारंगा सुवेदी ने असहमति जताते हुए कहा था कि सरकार के निर्णय को लागू करने से कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी।
सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने महान्यायाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से दोनों पक्षों से लिखित जवाब भी मांगे थे। संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा भी की थी। यह रिट याचिका भवानी न्यौपाने ने दायर की थी। वह नेपाल सरकारी कर्मचारी संगठन की केंद्रीय समिति की अध्यक्ष हैं। उन्होंने सरकार द्वारा ट्रेड यूनियनों को भंग करने की घोषणा को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खट-खटाया था।
ताजा फैसले के साथ अब सरकार को सरकारी संस्थानों में कार्यरत ट्रेड यूनियनों को भंग करने के अपने निर्णय को लागू करने की राह में मौजूद प्रमुख कानूनी बाधा से राहत मिल गई है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास