ज़ापोरोज़े परमाणु संयंत्र के पास सैन्य गतिविधियां बढ़ीं, आईएईए ने जताई चिंता

13 Jun 2026 22:40:53

मॉस्को, 13 जून (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास सैन्य गतिविधियां असामान्य और अप्रत्याशित रूप से बढ़ गईं हैं।

आईएईए के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि संयंत्र के निकटवर्ती क्षेत्रों में भारी गोलाबारी और सैन्य टुकड़ियों की हलचल पिछले कुछ दिनों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। उन्होंने सभी परमाणु सुविधाओं के पास ज़्यादा से ज़्यादा सैन्य संयम बरतने की ज़रूरत दाेहरायी है।

महानिदेशक ग्रॉसी ने कहा, ज़ापोरोज़े संयंत्र के पास सैन्य गतिविधियों का इस स्तर तक बढ़ना सीधे तौर पर परमाणु सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। मैं दोनों पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने की अपनी अपील को दोहराता हूं। उन्हाेंने यह भी कहा कि आईएईए सैन्य संघर्ष के दौरान परमाणु सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उल्लेखनीय है कि ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र वर्तमान में रूसी बलों के नियंत्रण में है, लेकिन इसे चलाने वाला तकनीकी स्टाफ यूक्रेनी है। पिछले कई महीनों से दोनों देश एक-दूसरे पर इस संयंत्र के आसपास गोलाबारी करने का आरोप लगाते रहे हैं।

एजेंसी ने यह भी बताया कि फेरोस्प्लावनया-1 विद्युत पारेषण लाइन की मरम्मत सफल होने के बाद, शनिवार को स्टेशन को पावर ग्रिड से फिर से जोड़ दिया गया है।

सैन्य संघर्ष के दौरान परमाणु संयंत्र में बिजली जाने की यह 19वीं घटना थी। बुधवार देर रात सैन्य कार्रवाई से हुए नुकसान के कारण प्लांट का 330 किलोवोल्ट लाइन से कनेक्शन टूट गया था। इसके चलते, अपने छह बंद रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए ज़रूरी बिजली के लिए प्लांट को इमरजेंसी डीज़ल जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ा था।

लगभग तीन दिनों तक बिजली गुल रहने की यह घटना, साइट पर बिजली जाने की सबसे लंबी घटनाओं में से एक थी, जो इलेक्ट्रिकल ग्रिड की बेहद नाज़ुक स्थिति को दिखाती है। आईएईए की एक टीम ने संयंत्र के पास मरम्मत के काम की निगरानी की।

परमाणु सुरक्षा के लिए ज़रूरी अन्य प्रयासों के तहत, आईएईए इस संयंत्र के स्विचयार्ड में मरम्मत के कामों और संयंत्र के पास एक और इलाके में बारूदी सुरंगें हटाने के काम पर नज़र रख रहा है ताकि संयंत्र की मुख्य पावर लाइन 750 केवी 'निप्रोव्स्का' की मरम्मत भी हो सके, जो मार्च से बंद पड़ी है।

महानिदेशक के अनुसार संयंत्र के लिए बाहरी बिजली की व्यवस्था करने और परमाणु दुर्घटना को रोकने के लिए दोनों पावर लाइनों और स्विचयार्ड की मरम्मत ज़रूरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया

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