जैन धर्म की शिक्षाएं, शांति, आत्म-संयम और नैतिक जीवन जीने का एक शाश्वत मार्ग दिखाती हैं : ओम बिरला

18 Jun 2026 19:25:53
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला कार्यक्रम को संबोधित करते हुए


जैन संतों, साध्वियों और श्रद्धालुओं को नमन करते हुए ओम बिरला


रायपुर, 18 जून (हि.स.)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जैन मुनि और संत, जैन दर्शन के सिद्धांतों और मूल्यों के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में सामाजिक परिवर्तन ला रहे हैं । उन्होंने कहा कि भगवान महावीर और जैन दर्शन के सिद्धांत आज भी मानवता को शांति, आत्मसंयम, करुणा और अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं।

आचार्य विनय कुशल महाराज के भव्य आचार्य पदारोहण समारोह में गुरुवार को अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष

बिरला ने वर्तमान समय की चुनौतियों का समाधान करने में जैन दर्शन की शिक्षाओं को बहुत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय, जबकि समाज तनाव, चिंता, संघर्ष और नैतिक मूल्यों के पतन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। जैन धर्म की शिक्षाएँ शांति, आत्म-संयम और नैतिक जीवन जीने का एक शाश्वत मार्ग दिखाती हैं।

लोस अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केन्द्रीय मंत्री तोखन साहू, सांसद बृजमोहन अग्रवाल एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। दोनों अतिथियों ने जैन मुनियों का आशीर्वाद प्राप्त कर आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हो रहे आचार्य विनयकुशल मुनि महाराज को नमन किया।

उन्होंने जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची खुशी केवल भौतिक संपदा से प्राप्त नहीं की जा सकती। बल्कि, आत्म-संयम, अपने मन पर नियंत्रण, विचारों की पवित्रता और नैतिक मूल्यों के पालन से ही स्थायी संतुष्टि प्राप्त होती है। इस संदर्भ में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अहिंसा, करुणा और संयम संबंधी भगवान महावीर की शिक्षाएं आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि सभी जीवों के प्रति अहिंसा, करुणा और दया का व्यवहार करके ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जैन संतों ने सत्य, सहानुभूति और आध्यात्मिक जागरूकता जैसे मूल्यों आधारित नैतिक समाज के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

बिरला ने उन संतों के प्रेरक उदाहरण पर प्रकाश डाला जो अपने अंतर्मन को दृढ़ बनाने और समाज का मार्गदर्शन करने के लिए दीर्घ उपवास एवं कठोर आध्यात्मिक साधना करते हैं। गहन आध्यात्मिक अनुशासन के माध्यम से एक युवा बाल मुनि द्वारा सिद्धि प्राप्त करने की उल्लेखनीय उपलब्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि कम आयु में भी एकाग्रता, ज्ञान और तपस्या के माध्यम से अपने जीवन को पूरी तरह से बदला जा सकता है।

उन्होंने लोगों से सत्य, नैतिकता, आत्म-अनुशासन और करुणा के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने दोहराया कि जैन संतों की शिक्षाएं और भगवान महावीर का दर्शन शांतिपूर्ण, नैतिक और प्रबुद्ध समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा के प्रभावशाली स्रोत बनी हुई हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आचार्य पद केवल एक पद नहीं, बल्कि तप, त्याग, ज्ञान और समाज को दिशा देने वाली साधना का सर्वोच्च प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर और जैन दर्शन के सिद्धांत आज भी मानवता को शांति, आत्मसंयम, करुणा और अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव और संघर्षों से जूझ रहा है, तब जैन दर्शन की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज का आचार्य पदारोहण संपूर्ण जैन समाज के लिए गौरव का क्षण है। शतावधानी हंसभद्र मुनि महाराज ने अपनी विलक्षण स्मरणशक्ति, ज्ञान और साधना के बल पर देशभर में विशेष पहचान बनाई है। उनके तप और साधना से समाज को नई दिशा मिल रही है।

उन्होंने सभी जैन संतों, साध्वियों और श्रद्धालुओं को नमन करते हुए महोत्सव के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों से सत्य, नैतिकता, आत्म-अनुशासन और करुणा के मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों के आधार पर मजबूत तथा अधिक सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण हो सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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