
नई दिल्ली, 19 जून (हि.स.)। हिमालय क्षेत्र में देश का नया जलवायु निगरानी केंद्र बनने जा रहा है। यह कदम जलवायु अनुसंधान को मजबूती प्रदान करेगा। इस संबंध में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे और आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एआरआईईएस) नैनीताल के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता 50 वर्षों से अधिक अवधि के लिए मान्य होगी।
समझौते के तहत उत्तराखंड के देवस्थल वेधशाला में भारत जलवायु अवलोकन नेटवर्क (बीसीओएन) के अंतर्गत दीर्घकालिक जलवायु अवलोकन केंद्र स्थापित किया जाएगा।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी जानकारी के अनुसार यह केंद्र हिमालयी क्षेत्र में मौसम, ग्रीनहाउस गैसों, वायुमंडलीय प्रदूषकों और मिट्टी की नमी जैसे महत्वपूर्ण मानकों की निगरानी करेगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार, देवस्थल का स्वच्छ और ऊंचाई वाला वातावरण जलवायु परिवर्तन से जुड़े अध्ययनों के लिए बेहद उपयुक्त है। यहां से प्राप्त आंकड़े हिमालयी क्षेत्र में जलवायु प्रक्रियाओं को समझने और प्रदूषण के प्रभावों का आकलन करने में मदद करेंगे।
बीसीओएन परियोजना पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में उच्च-गुणवत्ता वाला जलवायु डेटा तैयार करना और जलवायु परिवर्तन पर शोध को बढ़ावा देना है।
नेटवर्क से प्राप्त आंकड़े भारत के जलवायु मॉडल और भविष्य के मौसम एवं जलवायु पूर्वानुमानों को अधिक सटीक बनाने में भी सहायक होंगे। यह पहल भारत को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और वैज्ञानिक आधार पर नीति निर्माण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी