
नई दिल्ली, 02 जून (हि.स.)। आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर लोकतंत्र सेनानी संघ ने देशव्यापी जनजागरण अभियान की घोषणा करते हुए पांच जून को दिल्ली विधानसभा के समक्ष एक दिवसीय सांकेतिक उपवास आंदोलन आयोजित करने का ऐलान किया है।
संघ ने इस अभियान के माध्यम से आपातकाल की ऐतिहासिक घटनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान से जुड़ी मांगों को उठाने का संकल्प व्यक्त किया है।
लोकतंत्र सेनानी संघ ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में लोकतंत्र सेनानी संघ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजन ढींगरा, लोकतंत्र सेनानी संघ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओ.पी. बब्बर और वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानियों तथा संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 1975 से 1977 के बीच लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन की उस अवधि को देश की भावी पीढ़ियों तक सही संदर्भों में पहुंचाना आवश्यक है।
संघ ने केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें वर्ष 1975-77 के आपातकाल के इतिहास को विद्यालयी पाठ्यक्रम में कक्षा 8 से 12 तक अनिवार्य रूप से शामिल करना, “संविधान हत्या दिवस” के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और तंत्र की पहचान हेतु न्यायिक जांच आयोग का गठन तथा दिल्ली में लोकतंत्र सेनानियों और आपातकाल पीड़ितों को सम्मान निधि एवं राजकीय मान्यता प्रदान करना शामिल है।
लोकतंत्र सेनानी संघ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजन ढींगरा ने कहा कि देश के 12 राज्यों में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान निधि और राजकीय मान्यता प्रदान की जा रही है, जबकि दिल्ली में अब तक ऐसी व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों का उदाहरण देते हुए दिल्ली सरकार से भी समान व्यवस्था लागू करने की मांग की।
पत्रकार वार्ता में उपस्थित लोकतंत्र सेनानी राजकुमार सपड़ा और अशोक गुप्ता महाजन ने आपातकाल के दौरान जेल में बिताए अपने अनुभव साझा किए। राजकुमार सपड़ा तिहाड़ जेल में बंद रहे, जबकि अशोक गुप्ता महाजन ने जालंधर और फिरोजपुर जेल में लगभग नौ महीने बिताए थे।
राजन ढींगरा ने बताया कि संगठन की स्थापना वर्ष 2008 में मध्य प्रदेश में कैलाश सोनी द्वारा की गई थी। संगठन का उद्देश्य देशभर के लोकतंत्र सेनानियों और विभिन्न आंदोलनों में योगदान देने वाले लोगों को एक मंच पर लाकर उनके सम्मान और अधिकारों के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि असम से लेकर तमिलनाडु तक संगठन की इकाइयां सक्रिय हैं।
पदाधिकारियों ने बताया कि उनकी मांगों के समर्थन में अब तक 10 हजार से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षर एकत्र किए जा चुके हैं। इन हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सरकार को सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान दिल्ली में लगभग 1,050 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल थे।
संघ ने प्रधानमंत्री द्वारा 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित किए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए दिल्ली सरकार से भी इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की। संगठन ने देशभर के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और लोकतंत्र समर्थक समूहों से अभियान में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संवैधानिक चेतना के प्रसार के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी