सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच बोलीविया में आपातकाल लागू

20 Jun 2026 15:16:53
राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज  (फाइल फाेटाे)


ला पाज, 20 जून (हि.स.)। दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में पिछले कई सप्ताह से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सड़कों की नाकेबंदी के बीच राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने देश में शनिवार को अगले आदेश तक आपातकाल घोषित कर दिया।

तुर्किये की सरकारी संवाद समिति अनाडाेलू एजेंसी और अन्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मजदूर यूनियनों, किसान संगठनों और पूर्व राष्ट्रपति इवो मोरालेस के समर्थकों के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शनों में राष्ट्रपति पाज़ के इस्तीफे की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, आर्थिक दबाव, ईंधन संकट और जीवनयापन की बढ़ती लागत को लेकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं।

लगातार जारी नाकेबंदी के कारण देश के कई हिस्सों में खाद्य पदार्थों, ईंधन और दवाइयों की कमी हो गई है। पिछले लगभग 50 दिनों से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने से व्यापार, परिवहन और आपूर्ति शृंखला पर व्यापक असर पड़ा है।

राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति पाज़ ने कहा कि उन्होंने देशभर में सड़कों पर सामान्य आवाजाही बहाल करने के लिए स्टेट ऑफ़ एक्सेप्शन लागू करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, बोलीविया के लोग ऐसी नाकेबंदी के बंधक बनकर नहीं रह सकते जो उन्हें काम करने, पढ़ाई करने, इलाज कराने, ज़रूरी सामान जुटाने और अपने घरों तक राशन पहुंचाने से रोकती हो।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस कदम से सेना और पुलिस को व्यवस्था बहाल करने तथा देशभर में यातायात और आवश्यक सेवाओं को सामान्य करने में मदद मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठित समूह हिंसा का सहारा लेकर देश को ठप करने की कोशिश कर रहे हैं। पाज़ ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की और जायज़ मांगों पर समझौते की कोशिश भी की, लेकिन हालात में सुधार नहीं होने के कारण आपातकाल लागू करने का निर्णय लिया गया।

गौरतलब है कि पिछले महीने राष्ट्रपति पाज़ ने एक कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत सेना को आंतरिक संघर्षों में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि उन्होंने पहले कहा था कि आपातकाल लागू करना अंतिम विकल्प होगा।

सात महीने पहले सत्ता संभालने वाले मध्यमार्गी नेता पाज़ को देश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकटों में से एक का सामना करना पड़ रहा है। विदेशी मुद्रा की कमी, प्राकृतिक गैस निर्यात में गिरावट, 40 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंची महंगाई और ईंधन संकट ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।

मौजूदा संकट मई में तब गहराया, जब सरकार ने राजकोषीय घाटा कम करने के लिए लंबे समय से जारी ईंधन सब्सिडी में कटौती की थी। इसके बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए।

राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग के अलावा, यूनियनें वेतन वृद्धि, ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता और डॉलर की कमी दूर करने की भी मांग कर रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है, जिसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

Powered By Sangraha 9.0