सरकार ने 16 एफडीसी दवाएं प्रतिबंधित कीं

20 Jun 2026 18:33:53
स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय


नई दिल्ली, 20 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार ने निश्चित खुराक संयोजन (एफडीसी) वाली 16 दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इन दवाओं में कुछ त्वचा संबंधी, दर्द निवारक एवं ऐंठनरोधी दवाएं और एंटीबायोटिक शामिल हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम-1940 की धारा 26ए के तहत अधिसूचना जारी कर 16 एफडीसी के निर्माण, बिक्री और मानव उपयोग के लिए वितरण पर रोक लगा दी है। ये अधिसूचनाएं तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

मंत्रालय ने सभी राज्य औषधि नियंत्रकों, नियामक प्राधिकरणों और प्रवर्तन एजेंसियों को अधिसूचनाओं का कड़ाई से कार्यान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। निर्माताओं, आयातकों, वितरकों और अन्य हितधारकों को भी कानून के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने की सलाह दी गई है।

एफडीसी वे दवाएं है जिनमें एक ही गोली या कैप्सूल में दो या दो से अधिक सक्रिय दवाइयां एक निश्चित अनुपात में मिलाई जाती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य उपचार को आसान बनाना, कम गोलियां खाना और मरीजों का सहयोग बढ़ाना है। ये दवाइयां अक्सर उन बीमारियों में इस्तेमाल की जाती हैं जिनमें कई दवाओं की जरूरत होती है।

ये हैं प्रतिबंधित दवा संयोजन-

एसिटाइल सैलिसिलिक एसिड, एथोहेप्टाज़ीन। एलोवेरा का अर्क, एलेंटोइन, अल्फाटोकोफेरोल एसीटेट, डी-पेंथेनॉल, विटामिन ए। एलोवेरा का अर्क, विटामिन ई, डाइमेथिकोन, ग्लिसरीन। एलो वेरा, जोजोबा तेल, विटामिन ई। एलोवेरा, ऑरेंज ऑयल। एलोवेरा, जोजोबा तेल, व्हीट जर्म ऑयल, टी ट्री तेल। एलोवेरा, विटामिन ई, हर्बल। डाइसाइक्लोमाइन, पैरासिटामोल, क्लिडिनियम ब्रोमाइड। डाइसाइक्लोमाइन, पैरासिटामोल, क्लिडिनियम ब्रोमाइड, क्लोर्डियाज़ेपॉक्साइड। ग्लिक्लाजाइड, क्रोमियम पिकोलीनेट। पैरासिटामोल, लिग्नोकेन। एमोक्सिसिलिन, सेराटियोपेप्टिडेज़, लैक्टोबैसिलस स्पोरोजेन्स। एमोक्सिसिलिन, क्लोक्सासिलिन, लैक्टिक एसिड बैसिलस, सेराटियोपेप्टिडेज़। एमोक्सिसिलिन, सेराटियोपेप्टिडेज़। सेफैड्रोक्सिल, प्रोबेनेसिड। सेफ्यूरोक्सिम, सेराटियोपेप्टिडेज़।

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) ने विभिन्न एफडीसी की जांच करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति का काम तर्कहीन, चिकित्सीय औचित्य का अभाव रखने वाले या मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक एफडीसी की पहचान करना था। वैज्ञानिक मूल्यांकन एवं विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 16 ऐसे प्रतिबंधित एफडीसी के खिलाफ कार्रवाई की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

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