स्विट्जरलैंड में नाज़ी प्रतीकों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी

20 Jun 2026 18:40:53
नाजी अभिवादन करता जर्मनी का तानाशाह हिटलर (फाइल फाेटाे)


बर्न, 20 जून (हि.स.)। स्विट्जरलैंड में बढ़ती यहूदी-विरोधी घटनाओं के बीच सार्वजनिक स्थानों पर हिटलर सैल्यूट और अन्य नाज़ी प्रतीकों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार ने नया कानून प्रस्तावित किया है। संसद में शुक्रवार को पेश किए गए इससे संबंधित विधेयक में ऐसे प्रतीकों के सार्वजनिक उपयोग, प्रदर्शन और प्रसार पर रोक लगाने के साथ उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

स्विस ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एसआरजी) एसएसआर की एक शाखा एसडब्ल्यूआई स्विसइन्फो.सीएच और अन्य मीडिया रिपाेर्ट के अनुसार सरकार ने शुक्रवार को संसद में नाज़ी प्रतीकों से संबंधित एक नए विशेष कानून पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। सरकार ने कहा है कि नाज़ी प्रतीक ऐसी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं जो मानव जीवन के प्रति अनादर दिखाती है और लोकतांत्रिक तथा उदार समाज के मूलभूत मूल्यों के विपरीत है। सरकार ने स्पष्ट किया कि नस्लवाद और यहूदियों के प्रति नफरत को समाज में किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब देश में यहूदी-विरोधी घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वर्तमान स्विस कानून के तहत केवल उन लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है जो नाज़ी या अन्य चरमपंथी प्रतीकों का उपयोग प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से करते हैं, जबकि बिना प्रचार के ऐसे प्रतीकों का प्रदर्शन करने वालों को दंडित नहीं किया जा सकता।

प्रस्तावित कानून में नाज़ी प्रतीकों- जिनमें झंडे, बैज, प्रतीक-चिह्न, इशारे, नारे और अभिवादन शामिल हैं - के इस्तेमाल, उन्हें पहनने, दिखाने या सार्वजनिक रूप से फैलाने पर रोक लगाई गई है। इन प्रतीकों के अलग-अलग रूप, या ऐसी चीज़ें जो ऐसे प्रतीकों या उनके रूपों को दिखाती हैं या उनमें शामिल करती हैं - जैसे लेख, ऑडियो या विज़ुअल रिकॉर्डिंग या तस्वीराें पर भी रोक लगाई जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार अगर कोई इस रोक का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर 200 स्विस फ़्रैंक (250 डाॅलर) का जुर्माना लगाया जाएगा।

इस कानून में कुछ अपवाद भी शामिल किए गए हैं। शैक्षिक, वैज्ञानिक, कलात्मक, पत्रकारिता और अकादमिक उद्देश्यों के लिए नाज़ी प्रतीकों के उपयोग की अनुमति होगी। हालांकि, इस विधेयक पर मतदान की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन इसके पारित होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, क्योंकि स्विस संसद ने वर्ष 2024 में सरकार को ऐसा कानून तैयार करने का निर्देश दिया था।

-------------

हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

Powered By Sangraha 9.0