
वॉशिंगटन, 20 जून (हि.स.)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया है कि उनकी सरकार ने अब तक आठ युद्ध रुकवाएं हैं, लेकिन इनमें से ईरान युद्ध सबसे चुनौतीपूर्ण था।
लेबनान की संवाद समिति नेशनल न्यूज एजेंसी और विभिन्न मीडिया रिपाेर्ट के अनुसार ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन की नीति सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीति, बातचीत और राजनीतिक समाधान पर आधारित रही है। उनके अनुसार, लंबे समय से चल रहे संघर्षों को समाप्त करने के प्रयासों का उद्देश्य मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करना तथा क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना था।
राष्ट्रपति ने अमेरिकी रक्षा मंत्री और सेना की भी सराहना करते हुए कहा कि युद्ध और संकट की परिस्थितियों में उन्होंने शानदार काम किया। उन्होंने अमेरिकी सशस्त्र बलों के प्रदर्शन को पेशेवर और प्रभावी बताया।
ट्रंप ने इसके पहले फ्रांस के एविएन में 15-17 जून तक आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में भी ऐसा ही दावा किया था।
ट्रंप ने जिन 8 संघर्षों का उल्लेख किया उसमें इज़राइल-ईरान, इजराइल-हमास, सर्बिया-कोसोवो, आर्मेनिया-अज़रबैजान, रवांडा-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मिस्र-इथियोपिया तथा थाईलैंड-कंबोडिया शामिल हैं। इसके अलावा भारत-पाकिस्तान युद्ध का भी जिक्र किया।
ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़ा संकट अन्य सभी विवादों की तुलना में अधिक जटिल था। क्योंकि इस मामले में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के हित जुड़े होने के कारण सबको सहमति के बिंदु तक लाना एक चुनौती थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके इजराइल के साथ “बहुत अच्छे संबंध” हैं। उन्होंने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन देशों के साथ अमेरिका के संबंध बेहतरीन हैं।
दूसरी ओर, ट्रंप के इन दावों के बीच इस बात को लेकर बहस जारी है कि इन संघर्षों में अमेरिकी भूमिका कितनी निर्णायक रही और क्या इन विवादों का स्थायी समाधान वास्तव में हासिल हुआ है।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी