
नई दिल्ली, 21 जून (हि.स.)। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव वीएल कंठा राव ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कहा कि यह योग दिवस कार्यक्रम लोगों को अपने दैनिक जीवन में योग को एक नियमित अभ्यास के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने अधिकारियों और स्वयंसेवकों की उत्साही भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि योग केवल एक दिन के उत्सव तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे वर्ष एक स्वस्थ जीवन शैली का अभिन्न अंग बनना चाहिए, जो व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ सामूहिक सामाजिक स्वास्थ्य में योगदान दे।
राष्ट्रीय मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की ओर से रविवार को यहां 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मुख्य समारोह में जल संसाधन विभाग के सचिव वीएल कंठा राव तथा पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीणा सहित जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में यमुना स्वच्छता अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों, यमुना टास्क फोर्स के सदस्यों, एनजीओ के प्रतिनिधियों, इको रूट्स फाउंडेशन के स्कूली बच्चों और स्थानीय समुदायों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके साथ ही पूरी गंगा बेसिन में एसपीएमजी, जिला गंगा समितियों (डीजीसी), गंगा प्रहरियों और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से विभिन्न घाटों और नदी तटों पर योग सत्र आयोजित किए गए।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल के अनुसार विभिन्न योगासनों और प्राणायाम का अभ्यास किया तथा समग्र स्वास्थ्य व कल्याण के लिए योग को जीवन शैली के रूप में अपनाने के महत्व बताया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में आयोजित योग दिवस समारोह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सीधे प्रसारण वाले संदेश से भी प्रेरणा ली, जिसमें प्रधानमंत्री ने योग को सद्भाव, अनुशासन, आंतरिक शांति और समग्र कल्याण का एक व्यावहारिक मार्ग बताया था।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग (योगा फॉर हेल्दी एजिंग) रखी गई है, जो सभी आयु वर्ग में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने में योग की भूमिका को बताती है। समारोह के हिस्से के रूप में अधिकारियों और प्रतिभागियों ने देशव्यापी अभियान एक पेड़ मां के नाम के तहत वृक्षारोपण भी किया, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पहल नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली और जनभागीदारी के माध्यम से नदी संरक्षण के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर