नेपाल में तेजी से फैल रहा बर्ड फ्लू संक्रमण, काठमांडू बना हॉटस्पॉट

21 Jun 2026 21:04:53
बर्ड फ्लू फैलने के बाद अंडो को नष्ट किया जा रहा है


काठमांडू, 21 जून (हि.स.)। नेपाल में पिछले कुछ समय से फैल रहा घातक एवियन इन्फ्लुएंजा यानी बर्ड फ्लू संक्रमण काठमांडू सहित देश के विभिन्न जिलों में तेजी से फैल रहा है।

पशु स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केवल व्यावसायिक रूप से पाले जा रहे मुर्गों में ही नहीं, बल्कि स्थानीय और जंगली पक्षियों, विशेषकर कौवों में भी बर्ड फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई है। इससे इस बार का प्रकोप और अधिक जटिल तथा संवेदनशील बन गया है। संक्रमण नियंत्रण के लिए सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को तैनात कर संक्रमित पक्षियों, अंडों और चारे को नष्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

पशु स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख डा उमेश दहाल के अनुसार, फिलहाल काठमांडू बर्ड फ्लू संक्रमण का केंद्र बन चुकी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तीनों जिलों की विभिन्न स्थानीय इकाइयों में संक्रमण की मौजूदगी तेजी से देखी गई है। हालांकि पहले इसे नियंत्रित किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन वायरस की बदलती प्रकृति और अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण संक्रमण दोबारा फैलने लगा है।

महानिदेशक दाहाल ने बताया कि घाटी में केवल व्यावसायिक फार्म ही नहीं, बल्कि खुले में रहने वाले जंगली पक्षियों में भी संक्रमण पाए जाने से नियंत्रण कार्य और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

काठमांडू के विभिन्न क्षेत्रों में कौवों के मृत पाए जाने के बाद जांच में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई, जो इस वायरस के समुदाय और पर्यावरण में व्यापक रूप से फैलने का संकेत है।

राजधानी के बाहर काभ्रे और चितवन जिलो के कुछ व्यावसायिक फार्मों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल संक्रमण का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अभी भी काठमांडू में केंद्रित है।

बर्ड फ्लू प्रकोप के कारण नेपाल के पोल्ट्री व्यवसाय को इतिहास की सबसे बड़ी क्षतियों में से एक झेलनी पड़ रही है। सरकार द्वारा जारी बर्ड फ्लू नियंत्रण नियमावली के अनुसार, संक्रमण की पुष्टि वाले क्षेत्र के निर्धारित दायरे में मौजूद सभी पक्षियों, अंडों, चारे और अन्य संक्रमित सामग्रियों को नष्ट करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसी व्यवस्था के तहत विभाग बड़े पैमाने पर जैविक नष्टीकरण का कार्य कर रहा है।

डा उमेश दहाल के अनुसार, अब तक देशभर में लगभग 5.5 लाख से 6 लाख तक मुर्गियों और अन्य पक्षियों को नष्ट किया जा चुका है। लगातार नए संक्रमित क्षेत्र सामने आने के कारण यह संख्या तेजी से बढ़ी है।

इसके अलावा संक्रमण रोकने के लिए 10 लाख से अधिक अंडों और करीब 200 से 500 टन यानी 2 लाख 7 हजार किलोग्राम से अधिक चारा एवं अन्य फीड सामग्री को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संक्रमण की पुष्टि होते ही विभाग की टीम संबंधित फार्म को सील कर देती है और वहां मौजूद पक्षियों व अंडों को नष्ट कर सुरक्षित तरीके से गड्ढा खोदकर दफनाने का काम किया जा रहा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

Powered By Sangraha 9.0