उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती दर्शन के लिए अब एक मोबाइल नंबर से 3 महीने में सिर्फ एक बार मिलेगी अनुमति

22 Jun 2026 16:03:53
भगवान महाकाल का भस्म आरती में हुआ राजा स्वरूप श्रृगार


जयपुर के श्रद्धालु ने भगवान को अर्पित किया चांदी का छत्र


उज्जैन, 21 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर में भस्म आरती के लिए सोमवार से नई व्यवस्था लागू हो गई है। अब श्रद्धालु बाबा महाकाल की भस्म आरती की अनुमति के लिए तीन माह में सिर्फ एक बार अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर सकेंगे।

यह व्यवस्था प्रोटोकॉल से आने वाले ऐसे मोबाइल नंबरों पर भी लागू होगी, जिनसे हर माह भस्म आरती की अनुमति ली जा रही है। हालांकि, मंदिर समिति का कहना है कि यह व्यवस्था पहले से लागू है, जिसे अब और प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।

करीब दो वर्ष पहले तक श्रद्धालु भस्म आरती की बुकिंग 15 दिन पहले ऑनलाइन करा सकते थे। इसके लिए मोबाइल नंबर से जुड़ा कोई विशेष नियम नहीं था। तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने 2024 में भस्म आरती की बुकिंग में धांधली की शिकायतों के बाद एक आधार और एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में एक बार अनुमति का नियम बनाया था। कुछ समय तक ये व्यवस्था चली, लेकिन बाद में बंद कर दी गई। अब फिर से शिकायतें बढ़ने पर नियम को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।

पहले प्रोटोकॉल से हर महीने बुकिंग संभव थी, लेकिन इस नई व्यवस्था में श्रद्धालुओं को एक बार अनुमति लेने के बाद उसी मोबाइल नंबर से दोबारा बुकिंग के लिए 90 दिन का इंतजार करना होगा। अब हर मोबाइल नंबर से तीन महीने में सिर्फ एक बार बुकिंग हो सकेगी। इस नई व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य बार-बार दर्शन करने वालों पर रोक लगाना और सबको समान मौका है।

महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। अब इसे और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है, ताकि आम श्रद्धालुओं को भी आसानी से दर्शन का मौका मिले। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं हो सकेगा। इस नियम से उन आम भक्तों को फायदा होगा जो महीनों तक ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते थे। मंदिर समिति का दावा है कि इससे भस्म आरती में पारदर्शिता बढ़ेगी।

विश्व प्रसिद्ध ज्योर्तिलंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

सोमवार सुबह चार बजे महाकालेश्वर मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन-अर्चन किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को मंत्रोच्चार के साथ हरिओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म रमाई गई। भस्म अर्पित करने के पश्चात शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों से बनी मालाएं अर्पित की गईं।

मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्प धारण किए भगवान महाकाल ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।

जयपुर के श्रद्धालु ने 1.3 किलो चांदी का छत्र अर्पित किया

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हुए जयपुर के सन सिटी नीदड़ निवासी भागचंद बलेसरा ने बाबा महाकाल को एक किलो 300 ग्राम चांदी से निर्मित अत्यंत सुंदर और कलात्मक छत्र अर्पित किया। श्रद्धालु भागचंद बलेसरा ने सोमवार को अपनी धर्मपत्नी सीता देवी, पुत्र गोविंद बलेसरा व सीताराम बलेसरा, पुत्री ममता, सुमन और अनिता तथा पौत्र महावीर बलेसरा के साथ 3.25 लाख रुपये मूल्य का चांदी का छत्र भेंट स्वरूप समर्पित किया। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर यह दिव्य छत्र बाबा महाकाल के मुखमंडल पर धारण कराया। छत्र अर्पण के बाद मंदिर समिति ने श्रद्धालु का सम्मान भी किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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