भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

22 Jun 2026 16:15:53
भारतीय किसान संगठन ने लिखा प्रधानमंत्री मोदी को पत्र


नई दिल्ली, 22 जून (हि.स.)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने और अमेरिकी दबाव में किसी भी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर न करने की अपील की है।

बीकेयू ने पत्र में कहा है कि फरवरी 2025 से भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अंतरिम समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है और 23-24 जून को नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर की यात्रा के दौरान इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

किसान संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आशंका जताई कि समझौते के तहत भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती कर सकता है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त टैरिफ सुरक्षा नहीं होने पर भारतीय किसान अमेरिकी सब्सिडी प्राप्त कृषि उत्पादों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि अमेरिका लंबे समय से भारत के कृषि और खाद्य उत्पाद बाजार में मौजूद बाधाओं को हटाने की मांग कर रहा है। किसानों का दावा है कि इससे अत्यधिक सब्सिडी वाले अमेरिकी डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के आयात का रास्ता खुल सकता है। साथ ही, आनुवंशिक रूप से संशोधित मक्का के भारत में प्रवेश की आशंका भी जताई गई है।

बीकेयू ने आरोप लगाया कि विश्व व्यापार संगठन में अमेरिका भारत की न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था में बदलाव के लिए दबाव बना रहा है। संगठन का कहना है कि यदि यह मुद्दा व्यापार समझौते का हिस्सा बनता है या किसी गोपनीय समझ के तहत शामिल किया जाता है, तो देश के करोड़ों धान और गेहूं उत्पादक किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

किसान संगठन ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि उन्होंने पहले आश्वासन दिया था कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में किसानों, मछुआरों तथा डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।

बीकेयू ने आग्रह किया कि सरकार अपने इस वादे पर कायम रहे और किसी भी ऐसे समझौते से बचे जो भारतीय कृषि और खाद्य सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकता हो।

संगठन ने कहा कि देश के किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता के भी महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, इसलिए उन्हें अत्यधिक सब्सिडी वाले विदेशी कृषि उत्पादों के साथ असमान प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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