
नई दिल्ली, 23 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को नई दिल्ली में वैश्विक बाजारों के लिए वस्त्र: 2030 तक 100 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करने की रणनीति विषय पर दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।
वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, आज यह शिखर सम्मेलन कैबिनेट सचिवालय की विभागीय शिखर सम्मेलन पहल के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूत करना और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना है।
इस दौरान भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाना - वस्त्र परिप्रेक्ष्य और निर्यात कैसे करें - वस्त्र परिप्रेक्ष्य नामक दो प्रकाशनों का विमोचन किया गया।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिला-आधारित निर्यात वृद्धि, उत्पाद विविधीकरण, मूल्यवर्धन, चैंपियन और आकांक्षी जिलों के लक्ष्य निर्धारण, तकनीकी वस्त्र, ब्रांडेड उत्पादों के निर्माण, स्थिरता, कौशल विकास और बेहतर बाजार पहुंच के महत्व पर जोर दिया। वस्त्र एवं विदेश मामलों की राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने भी सभा को संबोधित करते हुए निर्यात के लिए राज्य सरकारों की उत्प्रेरक भूमिका, विकेंद्रीकृत सोच, मूल्यवर्धन, उत्पाद विविधीकरण और ब्रांड निर्माण पर बल दिया।
इसके अलावा, 36 राज्य निर्यात कार्य योजनाएं (एसईएपी) और 200 जिला निर्यात कार्य योजनाएं (डीईएपी) तैयार की गई हैं।
शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खेत से रेशा, रेशा से कारखाना, कारखाना से फैशन और फैशन से विदेश (5F) के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है।
शिखर सम्मेलन के पहले दिन तीन सत्र आयोजित किए गए। पहला सत्र जिला और क्लस्टर आधारित निर्यात रणनीतियों, प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र पर गहन नीतिगत विचार-विमर्श पर केंद्रित था। दूसरे सत्र में उत्पाद और डिज़ाइन संवर्धन, मूल्यवर्धन, उपभोक्ता अनुकूलन, सामग्री नवाचार और तकनीकी वस्त्रों के अवसरों तथा ब्रांड पहचान पर ध्यान केंद्रित किया गया।
तीसरे सत्र में निर्यात को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारकों पर चर्चा हुई, जिनमें ऋण, रसद, अवसंरचना, पीएम-मित्र पार्क, राज्य नेतृत्व वाली नीति और प्रोत्साहन सहायता, प्रौद्योगिकी अपनाना, श्रम अनुपालन और कौशल विकास शामिल थे।
सत्र का मुख्य उद्देश्य लागत संबंधी बाधाओं को दूर करके, रसद और संपर्क को मजबूत करके तथा एकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देकर भारत के वस्त्र क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास में सुधार करना था।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी