
नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। आपातकाल के पहले मीसा बंदी, वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने भारत के संविधान को 100 फीसदी स्वीकार किया है और संविधान का सम्मान करते हैं। वोप्रख्यात पत्रकार पद्म भूषण राम बहादुर राय दिल्ली के द्वारका स्थित सीसीआरटी के सभागार में 'संविधान हत्या दिवस' की स्मृति और आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर आयोजित 'लॉन्ग लिव डेमोक्रेसी' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह विशेष कार्यक्रम चल रहे देशव्यापी आयोजनों के समापन के रूप में मनाया गया।
राम बहादुर राय ने देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों की चर्चा करते हुए कहा, जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक, हर प्रधानमंत्री को संविधान से कोई न कोई शिकायत रही लेकिन मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के संविधान को 100 फीसदी स्वीकार किया है और उसका पूरा सम्मान करते हैं।
राय ने आपातकाल (इमरजेंसी) के दौर को याद करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए 'खेल हो जाने के बाद खेल के नियम बदले' और विपक्ष को पूरी तरह से कमजोर कर दिया। राय ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि आपातकाल के दौरान संविधान में किए गए अवैध बदलावों को निरस्त कर 25 जून 1975 से पहले वाले मूल संविधान को बहाल किया जाए। संसद का कार्यकाल एक साल बढ़ाकर लाए गए 42वें संविधान संशोधन की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि 200 देशों के संविधान की उद्देशिका, प्रस्तावना में छेड़छाड़ नहीं की गयी लेकिन भारत के संविधान, जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था, उसकी पूरी तस्वीर बदल दी गई।
उन्होंने बताया कि अब हमारे पास दो महत्वपूर्ण दिवस हैं, एक 'संविधान दिवस' (जो संविधान का सम्मान सिखाता है) और दूसरा 'संविधान हत्या दिवस' (जो इसकी रक्षा करने का संकल्प दिलाता है)। इस दिवस को हमें संविधान को जानने, मानने, अपनाने और ज़रूरत पड़ने पर सुधार के लिए आवाज उठाने के संकल्प के रूप में मनाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी