देशभर में भाजपा मना रही संविधान हत्या दिवस, नितिन नवीन बोले- 25 जून 1975 को लोकतंत्र पर हुआ सबसे बड़ा आघात

25 Jun 2026 12:06:53
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ( फाइल फोटो)


नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। देशभर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गुरुवार को संविधान हत्या दिवस मना रही है। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों में पार्टी की ओर से कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव को याद किया जाएगा।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन हरियाणा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर संविधान हत्या दिवस मनाएंगे। वहीं पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा बिहार की राजधानी पटना में संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा देशभर में संगोष्ठियां, प्रदर्शनी और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

आपातकाल को याद करते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब संविधान की आत्मा को कुचलने का प्रयास किया गया। 25 जून 1975 की मध्यरात्रि को भारतीय लोकतंत्र पर स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा आघात किया गया। सत्ता बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोपा गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा नागरिक स्वतंत्रताओं को कुचलने का प्रयास हुआ।

एक्स पर साझा किए अपने संदेश में नितिन नवीन ने कहा कि यह दिन हमें लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और स्वतंत्रता की महत्ता का स्मरण कराता है। उन सभी लोकतंत्र सेनानियों को नमन, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया। दशकों तक आपातकाल के इस काले अध्याय को देश की सामूहिक स्मृति से मिटाने का प्रयास किया गया। लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और संविधान पर हुए इस प्रहार को इतिहास के हाशिये पर धकेल दिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लेकर इतिहास के साथ न्याय किया गया। संविधान हत्या दिवस हमें केवल अतीत की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह संकल्प भी कराता है कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हम सभी को सदैव सजग और समर्पित रहना पड़ेगा।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जो दल आज संविधान की दुहाई देता है, उसने आज तक आपातकाल के लिए देश से बिना शर्त माफी क्यों नहीं मांगी? यदि सचमुच संविधान की चिंता होती, तो सबसे पहले लोकतंत्र की हत्या के उस अपराध के लिए देश से क्षमा मांगी जाती।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित किया था। इसके बाद राष्ट्रहित नहीं, बल्कि सत्ता हित को प्राथमिकता दी गई। एक व्यक्ति की कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश की स्वतंत्रता को बंधक बना लिया गया और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा स्थापित संवैधानिक मूल्यों एवं लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कुचलने का प्रयास किया गया।

भारत सरकार ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की याद में हर वर्ष 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह दिन उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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