
नई दिल्ली, 26 जून (हि.स.)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन नियमों में संशोधन अधिसूचित किया है, जिससे देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा।
नए बदलाव के तहत अब 'फर्स्ट इन फर्स्ट आउट' (एफआईएफओ - जो पहले आए, वो पहले इस्तेमाल हो) या 'फर्स्ट एक्सपायरी फर्स्ट आउट' (एफईएफओ - जिसकी एक्सपायरी पहले हो, वो पहले इस्तेमाल हो) जैसे स्टॉक रोटेशन और रिकॉर्ड रखने के नियम केवल खाद्य निर्माण इकाइयों पर लागू होंगे। पहले यह सभी खाद्य व्यवसायों के लिए अनिवार्य था।
रिटेल दुकानदारों और अन्य गैर-निर्माण खाद्य व्यवसायों को इन नियमों से छूट दे दी गई है। इससे विशेषकर छोटे और मध्यम खाद्य कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम होने की उम्मीद है।
हालांकि सरकार ने साफ किया है कि जहां जरूरी होगा, वहां खाद्य सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी के मानक पहले की तरह लागू रहेंगे, ताकि उपभोक्ता सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
शुक्रवार को मंत्रालय ने बताया कि कदम जोखिम-आधारित और परिणाम-आधारित नियमन की दिशा में उठाया गया है। इससे पहले भी सरकार ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने, स्थायी लाइसेंस की सुविधा देने और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए नियमों में ढील जैसे कई सुधार किए हैं।
यह संशोधन राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और संबंधित हितधारकों से चर्चा के बाद लागू किया गया है और इसे नीति आयोग की सिफारिशों के अनुरूप बताया गया है।
नियमों में यह बदलाव खाद्य क्षेत्र में कारोबार को आसान बनाएगा, जबकि आवश्यक जगहों पर खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाए रखेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी