
नई दिल्ली, 28 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार ने चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण लाइसेंस की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने के लिए मेडिकल डिवाइसेज नियम, 2017 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित बदलावों के तहत क्लास-बी चिकित्सा उपकरणों के लिए लाइसेंस जारी करने की समयसीमा 140 दिन से घटाकर 115 दिन तथा क्लास-सी और क्लास-डी उपकरणों के लिए 105 दिन से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव रखा गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना, नियामकीय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना तथा देश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। साथ ही गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन से जुड़े मौजूदा मानकों को यथावत बनाए रखा जाएगा।
वर्तमान नियमों के तहत चिकित्सा उपकरणों को जोखिम के आधार पर क्लास ए, क्लास बी, क्लास सी और क्लास डी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें क्लास डी को सर्वाधिक जोखिम वाली श्रेणी माना जाता है। प्रत्येक श्रेणी के लिए विनिर्माण लाइसेंस आवेदन के निस्तारण की अलग-अलग समयसीमा निर्धारित है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत क्लास बी श्रेणी के चिकित्सा उपकरणों के लिए लाइसेंस जारी करने की समयसीमा 140 दिन से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव है। इस श्रेणी में ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक नीडल और पल्स ऑक्सीमीटर जैसे कम से मध्यम जोखिम वाले उपकरण शामिल हैं।
इसी प्रकार क्लास सी और क्लास डी श्रेणी के चिकित्सा उपकरणों के लिए लाइसेंस जारी करने की समयसीमा 105 दिन से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन श्रेणियों में कार्डियक स्टेंट, हिप एवं घुटना प्रत्यारोपण तथा अन्य ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट जैसे उच्च जोखिम वाले चिकित्सा उपकरण आते हैं।
मसौदा संशोधनों में आवेदन की जांच, अधिसूचित निकायों द्वारा ऑडिट, अनुपालन सत्यापन और लाइसेंस जारी करने सहित पूरी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित करने का भी प्रावधान किया गया है। इससे नियामकीय ढांचे में अधिक पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और दक्षता आएगी तथा उद्योग और मरीज दोनों को लाभ होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर