ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एआई-सक्षम ‘रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल’ किया लॉन्च, ग्रामीण योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को मिलेगा नया आधार

28 Jun 2026 23:13:53
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान एआई-सक्षम ‘रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल’ का शुभारंभ करते हुए।


नई दिल्ली, 28 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एआई-सक्षम ‘रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल’ लॉन्च किया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को यहां पूसा परिसर में आयोजित ‘राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन’ में इस पोर्टल का शुभारंभ किया। यह देश का पहला एकीकृत डिजिटल मंच है, जो जोखिम आधारित (रिस्क-बेस्ड) और अनुपालन आधारित (कम्प्लायंस) दोनों प्रकार के आंतरिक ऑडिट के संपूर्ण प्रबंधन को एक ही प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराएगा।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि पारंपरिक ऑडिट व्यवस्था को आधुनिक बनाने और उभरती डिजिटल तकनीकों का लाभ उठाने के उद्देश्य से इस पोर्टल का विकास किया गया है। मुख्य नियंत्रक लेखा (सीसीए) कार्यालय की परिकल्पना और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से विकसित यह पोर्टल मंत्रालय की डिजिटल गवर्नेंस यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

मंत्रालय के अनुसार, रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल ने आंतरिक ऑडिट की कागज आधारित और बिखरी हुई प्रक्रिया को समाप्त कर उसे डेटा आधारित, पारदर्शी और तकनीक समर्थ प्रणाली में बदल दिया है। इसमें ऑडिट योजना, क्रियान्वयन, रिपोर्टिंग, अनुपालन प्रबंधन, निगरानी और विश्लेषण जैसी सभी प्रक्रियाओं को एकीकृत किया गया है। इससे ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की निगरानी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सकेगी।

मंत्रालय ने बताया कि इस पोर्टल की अवधारणा पारंपरिक ऑडिट प्रक्रियाओं में मौजूद चुनौतियों को दूर करने के लिए विकसित की गई थी। पहले ऑडिट रिकॉर्ड अलग-अलग स्थानों पर बिखरे रहते थे, पत्राचार मैनुअल होता था, रिपोर्टिंग में देरी होती थी और पुराने ऑडिट रिकॉर्ड का विश्लेषण करना कठिन होता था। केंद्रीकृत डाटा भंडार के अभाव में बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं और जोखिमों की पहचान भी चुनौतीपूर्ण थी।

इन समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रालय ने ऑडिटरों, कार्यक्रम प्रभागों, क्षेत्रीय अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर एक समग्र डिजिटल मंच विकसित किया। इसका पायलट प्रोजेक्ट एक अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में शुरू किया गया था। पायलट परियोजना की सफलता के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया गया और अक्टूबर 2025 से इसके सभी प्रमुख मॉड्यूल पूरी तरह संचालित होने लगे।

मंत्रालय के अनुसार, यह पोर्टल अब ऑडिट योजना तैयार करने, अनुमोदन, ऑडिट टिप्पणियां दर्ज करने, कार्रवाई प्रतिवेदन (एटीआर), पैरा निस्तारण और अभिलेख संरक्षण तक पूरे ऑडिट चक्र का प्रबंधन करने में सक्षम हो चुका है।

रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल के प्रमुख उद्देश्यों में संपूर्ण ऑडिट प्रक्रिया का डिजिटलीकरण, ऑडिट इकाइयों और टिप्पणियों का केंद्रीकृत डाटाबेस तैयार करना, जोखिम आधारित ऑडिट योजना को बढ़ावा देना, ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाना, विश्लेषणात्मक उपकरणों के माध्यम से जोखिमों की पहचान करना तथा वास्तविक समय में निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल है।

मंत्रालय ने बताया कि पोर्टल में एंड-टू-एंड डिजिटल ऑडिट प्रबंधन, कार्रवाई प्रतिवेदन की ऑनलाइन समीक्षा, ऑडिट पैरा का डिजिटल निस्तारण, केंद्रीकृत रिकॉर्ड प्रबंधन और भूमिका आधारित एक्सेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ऑडिटर, ऑडिटी, राज्य सरकारें, जिला स्तरीय अधिकारी और अन्य अधिकृत हितधारक अपनी निर्धारित भूमिका के अनुसार इसका उपयोग कर सकेंगे।

पोर्टल में रीयल टाइम डैशबोर्ड और विश्लेषणात्मक उपकरण भी उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से ऑडिट कवरेज, लंबित टिप्पणियों, एटीआर अनुपालन, वित्तीय अनियमितताओं और ऑडिट प्रदर्शन की स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। निर्णय लेने वाले अधिकारी विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर समेकित आंकड़ों तक तुरंत पहुंच सकेंगे।

इस पोर्टल की एक विशेषता इसका ‘मैप व्यू मॉड्यूल’ है, जो देशभर में ऑडिट गतिविधियों की भौगोलिक स्थिति को डिजिटल मानचित्र पर प्रदर्शित करता है। इससे यह भी पता लगाया जा सकेगा कि कौन-सी ऑडिट इकाइयां अब तक कभी ऑडिट नहीं हुई हैं। मंत्रालय का मानना है कि इससे संसाधनों के बेहतर उपयोग और जोखिम आधारित प्राथमिकता निर्धारण में मदद मिलेगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि भविष्य में इस पोर्टल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों को और गहराई से जोड़ा जाएगा। इन तकनीकों के माध्यम से उच्च जोखिम वाली इकाइयों की पहचान, भविष्य के जोखिमों का पूर्वानुमान, पैटर्न विश्लेषण और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने की क्षमता को और मजबूत किया जाएगा।

मंत्रालय के अनुसार, पोर्टल के लागू होने के बाद ऑडिट रिपोर्टिंग में एकरूपता आई है, रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से पारदर्शिता बढ़ी है और कार्रवाई प्रतिवेदनों की निगरानी अधिक प्रभावी हुई है। स्वचालित प्रक्रियाओं के कारण अनुमोदन में तेजी आई है तथा भौतिक अभिलेखों और मैनुअल पत्राचार पर निर्भरता में कमी आई है।

इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के अंतर्गत नियंत्रक महालेखा (सीजीए) कार्यालय ने दिसंबर 2025 में सिद्धांततः मंजूरी देते हुए इस पोर्टल के आंतरिक ऑडिट मॉड्यूल को अन्य केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के लेखा कार्यालयों में लागू करने की सहमति प्रदान की थी। सीजीए ने इसे जोखिम आधारित और अनुपालन आधारित दोनों प्रकार के ऑडिट के लिए देश का पहला एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म बताया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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