‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के नए दिशा-निर्देश जारी, जांच, उपचार और डिजिटल ट्रैकिंग पर रहेगा जोर

युगवार्ता    29-Jun-2026
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‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देश जारी करते केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा


‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देश जारी करते हुए केन्द्रीय मंत्री


नई दिल्ली, 29 जून (हि.स.)। देश से एनीमिया (खून की कमी) को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए। नए दिशा-निर्देशों के साथ ‘एनीमिया मुक्त भारत’ कार्यक्रम को अब ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के रूप में विस्तारित किया गया है। अब यह केवल आयरन की गोलियां उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जांच, उपचार, संतुलित एवं आयरन युक्त भोजन तथा ‘जन चेतना’ के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सरकार ने एनीमिया प्रबंधन की रणनीति को रोकथाम से आगे बढ़ाकर उपचार आधारित मॉडल में परिवर्तित किया है।

विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक के दौरान जारी ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देश एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रम को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है।

नई गाइडलाइन में कम जन्म वजन वाले 0 से 6 माह तक के शिशुओं को सातवें लाभार्थी समूह के रूप में शामिल किया गया है ताकि जन्म से ही एनीमिया के दुष्चक्र को तोड़ा जा सके। साथ ही ‘ईटिंग राइट’ यानी आयरन युक्त और संतुलित भोजन की आदत को सातवें हस्तक्षेप के रूप में जोड़ा गया है। डिजिटल निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली को सातवें संस्थागत तंत्र के रूप में शामिल किया गया है। सरकार ने एनीमिया सेवाओं की निगरानी के लिए एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम भी विकसित किया है। गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच का रिकॉर्ड जननी पोर्टल, बच्चों का रिकॉर्ड आरबीएसके और यू-विन पोर्टल के माध्यम से दर्ज होगा। ये सभी डेटा एकीकृत एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल पर उपलब्ध होंगे, जिससे लाभार्थियों की जांच, उपचार, परामर्श और फॉलो-अप की पूरी प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी और बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।

इस अवसर पर ‘जन भागीदारी’ अभियान की भी शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य एनीमिया को सामान्य समस्या मानने की सोच बदलकर लोगों, परिवारों और समुदायों को इसके प्रति जागरूक और सक्रिय बनाना है।

इस अभियान के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर एनीमिया नियंत्रण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाएगा।

मंत्रालय का मानना है कि संशोधित एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत किए गए ये बदलाव देश में एनीमिया की दर कम करने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाने, शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु अनुपात घटाने तथा पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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