राज्यसभा में फिर नेता प्रतिपक्ष बने मल्लिकार्जुन खरगे, पुनर्निर्वाचन के बाद जारी हुआ बुलेटिन

29 Jun 2026 13:45:53
काँग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे


नई दिल्ली, 29 जून (हि.स.)। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को कर्नाटक से पुनर्निर्वाचित होने के बाद राज्यसभा में एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्रदान कर दी गई है। राज्यसभा सचिवालय की ओर से सोमवार को जारी संसदीय बुलेटिन के अनुसार, राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें 26 जून 2026 से प्रभावी रूप से सदन में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी है।

संसदीय बुलेटिन के अनुसार, खरगे का पिछला राज्यसभा कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो गया था। इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी मान्यता भी समाप्त हो गई थी। कर्नाटक से दोबारा राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद उन्हें नए कार्यकाल के लिए पुनः इस पद की मान्यता प्रदान की गई है।

इससे पहले सोमवार को संसद भवन स्थित सभापति कक्ष में उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने मल्लिकार्जुन खरगे को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ दिलाई। इस अवसर पर सदन के नेता एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

83 वर्षीय मल्लिकार्जुन खरगे वर्ष 2020 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने थे। अब वह लगातार दूसरी बार कर्नाटक से उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए हैं।

खरगे का राजनीतिक जीवन पांच दशक से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने वर्ष 1972 में पहली बार कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और बाद में लगातार नौ बार विधायक निर्वाचित हुए। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने कर्नाटक सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व संभाला तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाई।

वर्ष 2009 और 2014 में वह गुलबर्गा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में उन्होंने रेल मंत्री तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 2014 से 2019 तक वह लोकसभा में कांग्रेस के नेता रहे और अक्टूबर 2022 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

हाल ही में 10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनावों के बाद उच्च सदन के राजनीतिक समीकरणों में भी बदलाव आया है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की संख्या बढ़कर लगभग 152 तक पहुंच गई है, जबकि विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के पास करीब 64 सदस्य हैं।

राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। उच्च सदन में बीजू जनता दल (बीजद) के पांच तथा वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सात सदस्य हैं। दोनों दल किसी राष्ट्रीय गठबंधन का औपचारिक हिस्सा नहीं हैं, हालांकि विभिन्न विधेयकों और महत्वपूर्ण अवसरों पर वे केंद्र सरकार का समर्थन करते रहे हैं।------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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