
नई दिल्ली, 30 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) ने पिछले एक दशक में देश में सिंचाई आधारित कृषि परिवर्तन को नई दिशा दी है। केंद्र सरकार ने बताया कि वर्ष 2016-17 से अब तक योजना के तहत 2.7 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला है और 2.46 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का सृजन या पुनर्स्थापन किया गया है। इस अवधि में योजना के लिए 64,407 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अनुसार, एक जुलाई 2015 को शुरू की गई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य प्रत्येक खेत तक पानी पहुंचाना, जल उपयोग दक्षता बढ़ाना तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। योजना के तहत वर्षा जल संचयन, सूक्ष्म सिंचाई और खेत स्तर पर जल प्रबंधन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएमकेएसवाई के लिए 6,587 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2021-26 की अवधि के लिए योजना को 93,068.56 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ जारी रखा गया है।
योजना के तहत त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) प्रमुख घटक के रूप में उभरा है। वर्ष 2016-17 से अब तक इस मद में 21,023 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी गई, जिससे 1.73 करोड़ किसानों को लाभ मिला। वहीं, जलागम विकास कार्यक्रम के तहत 12,432 करोड़ रुपये की सहायता से 13.4 लाख किसानों को फायदा पहुंचा है।
‘हर खेत को पानी’ घटक के तहत अब तक 3,462 लघु सिंचाई तथा जलाशयों की मरम्मत एवं पुनरुद्धार परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इससे 5.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। भूजल आधारित हस्तक्षेपों से अतिरिक्त 88,550 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिली है।
मंत्रालय के अनुसार, ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (पीडीएमसी) घटक के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है। योजना की शुरुआत से अब तक 110.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में लाया जा चुका है, जो देश के कुल शुद्ध बोए गए क्षेत्र का लगभग 8 प्रतिशत है। छोटे और सीमांत किसानों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने के लिए 55 प्रतिशत तक तथा अन्य किसानों को 45 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जाती है।
मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किसानों उमा शंकर वर्मा और सुभाष वर्मा का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2016 में स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाने के बाद उनकी फसल उत्पादकता में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। पानी, बिजली, श्रम और उर्वरकों की खपत लगभग 50 प्रतिशत कम हुई तथा प्रति हेक्टेयर 60 से 70 हजार रुपये तक का लाभ प्राप्त हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर