आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की जरूरत: मुख्यमंत्री मोहन माझी

04 Jun 2026 14:53:53
मुख्यमंत्री मोहन माझी ने ब्रिक्स डीआरआरजी सत्र का उद्घाटन किया


-मुख्यमंत्री मोहन माझी ने ब्रिक्स डीआरआरजी सत्र का उद्घाटन किया, ओडिशा के आपदा प्रबंधन मॉडल पर प्रकाश डाला

भुवनेश्वर, 04 जून (हि.स.)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को पुरी में आयोजित ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन वर्किंग ग्रुप (डीआरआरजी) की तकनीकी बैठक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय एवं अंतर-राज्यीय सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन आपदा जोखिम न्यूनीकरण के वैश्विक प्रयासों को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण मंच है।

मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण अब केवल एक क्षेत्रीय विषय नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक स्थिरता, सतत विकास और मानव सुरक्षा का प्रमुख आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण और पर्यावरणीय क्षरण के कारण दुनिया भर में आपदाओं की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है, जिससे बेहतर तैयारी और समन्वित कार्रवाई अनिवार्य हो गई है।

ओडिशा के अनुभवों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने “शून्य मृत्यु ” सिद्धांत पर आधारित एक विश्वस्तर पर मान्यता प्राप्त आपदा प्रबंधन मॉडल विकसित किया है। राज्य ने वैज्ञानिक योजना, उन्नत पूर्व चेतावनी प्रणाली, मजबूत अवसंरचना, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से अपनी आपदा तैयारी क्षमता को लगातार मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा चक्रवात, लू, बिजली गिरने, तटीय क्षरण और शहरी जलवायु जोखिमों के प्रति संवेदनशील राज्य है। “ओडिशा का अनुभव दर्शाता है कि बेहतर तैयारी और मजबूत संस्थाएं आपदा प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकती हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक नवाचार तथा तकनीकी सहयोग आवश्यक होगा”।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर केंद्रित नीति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का 10 सूत्रीय एजेंडा आपदा प्रबंधन में तैयारी, तकनीक, जोखिम-आधारित विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

उन्होंने 160 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड कोस्टल हाईवे परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करेगी और चक्रवात संभावित तटीय क्षेत्रों में तेज निकासी, आपूर्ति शृंखला की निरंतरता और राहत कार्यों में सहायक होगी। इसके साथ ही उन्होंने 111 किलोमीटर लंबे कैपिटल रीजन रिंग रोड और भुवनेश्वर–कटक–पुरी–पारादीप आर्थिक क्षेत्र परियोजना का भी उल्लेख किया।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि 1999 के महाचक्रवात से मिले सबक ने ओडिशा की आपदा प्रबंधन प्रणाली को विश्वस्तर पर मजबूत और प्रभावी बनाया है। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि आपदा के समय समुदाय ही सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाले होते हैं, इसलिए राज्य ने अंतिम छोर तक सूचना पहुंचाने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत किया है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष कृष्ण एस. वत्सा तथा प्राधिकरण सदस्य रीता मिसाल भी उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि “पुरी डेलिबरेशन” वैश्विक आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान देगा और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो

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