
- अब तक के कार्यकाल में दीक्षित ने 20 से अधिक प्रकार के विमानों पर 3300 घंटे की उड़ान भरी
नई दिल्ली, 05 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार ने फाइटर पायलट एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को फिर से वायु सेना का उप प्रमुख नियुक्त किया गया है। जाने-माने टेस्ट पायलट एक जुलाई को अपना नया पद संभालकर वायु सेना में सबसे अहम लीडरशिप पदों में से एक की जिम्मेदारी लेंगे। उनकी नियुक्ति ऐसे अहम समय पर हुई है, जब भारतीय वायु सेना अपने आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने के कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रही है।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पहली बार 15 मई, 2023 को एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी के स्थान पर उप वायु सेना प्रमुख का पदभार संभाला था। एयर मार्शल एक योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर होने के साथ-साथ एक एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। उन्हें मिग-21, मिग-29 और मिराज-2000 जैसे विभिन्न प्रकार के विमानों को उड़ाने का अनुभव भी है। पिछले 23 सालों से आशुतोष दीक्षित वायुसेना का हिस्सा रहे हैं। अपने अब तक के कार्यकाल में दीक्षित ने 20 से अधिक प्रकार के विमानों पर 3300 घंटे की उड़ान भरी है। उन्होंने ऑपरेशन सफेद सागर और रक्षक में भाग लिया है।
उन्होंने भविष्य की प्रौद्योगिकियों को अपनाने से संबंधित कई परियोजनाओं का नेतृत्व किया है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया है कि भारतीय वायु सेना 'आत्मनिर्भरता' पर निरंतर ध्यान केंद्रित करते हुए आधुनिकीकरण हासिल करे। उप वायु सेना प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान एलसीए मार्क-1ए, मार्क-2 और एएमसीए सहित कई स्वदेशी विमान परियोजनाओं में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मौजूदा समय में एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।
इससे पहले वे केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय वायु कमान की कमान छोड़ दी। इसके बाद एक मई 2025 को उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल जॉनसन पी मैथ्यू के स्थान पर एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख का पदभार ग्रहण किया, जो 30 अप्रैल 2025 को सेवानिवृत्त हुए। वे दक्षिण पश्चिमी वायु कमान के वरिष्ठ वायु सेना अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। वह पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी के पूर्व छात्र हैं। वे बांग्लादेश स्थित रक्षा सेवा कमान एवं स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के भी पूर्व छात्र हैं।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र एयर मार्शल दीक्षित को 06 दिसंबर 1986 को फाइटर स्ट्रीम में कमीशन दिया गया था। ऑपरेशनल फ्लाइंग, फ़्लाइट टेस्टिंग, फ़ोर्स मॉडर्नाइजेशन और स्ट्रैटेजिक लीडरशिप में शानदार करियर वाले एयर मार्शल दीक्षित को करियर के दौरान 2026 में परम विशिष्ट सेवा पदक, 2023 में अति विशिष्ट सेवा पदक, 2006 में वायु सेना पदक और 2011 में विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। एयर मार्शल दीक्षित ने पश्चिमी क्षेत्र में एक फ्रंटलाइन फाइटर बेस मिराज-2000 स्क्वाड्रन की कमान संभाली, जो वायु सेना का प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस भी है।
उन्होंने इससे पहले वायु सेना मुख्यालय में प्रिंसिपल डायरेक्टर एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट, असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्लान) के रूप में काम किया है। वह एयरफोर्स के आधुनिकीकरण के प्रभारी होंगे। उप प्रमुख के रूप में वह भारतीय वायु सेना में नई खरीद और आपातकालीन शक्तियों के तहत सेवा के लिए किए जाने वाले अधिग्रहण की देखरेख करेंगे। दीक्षित मुख्यालय में अपने पहले के कार्यकाल के दौरान भारतीय वायु सेना में आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा रहे हैं।------------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम