इंडी गठबंधन की बैठक से पहले दिल्ली में लगे राहुल गांधी विरोधी पोस्टर, विपक्षी एकता पर उठे सवाल

08 Jun 2026 12:38:53
दिल्ली के प्रमुख गोलचक्करों पर लगे कांग्रेस और राहुल गांधी विरोधी पोस्टर।


दिल्ली के प्रमुख गोलचक्करों पर लगे कांग्रेस और राहुल गांधी विरोधी पोस्टर।


दिल्ली के प्रमुख गोलचक्करों पर लगे कांग्रेस और राहुल गांधी विरोधी पोस्टर।


नई दिल्ली, 8 जून (हि.स.)। विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडी’ (आईएनडीआईए) की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सोमवार को प्रस्तावित बैठक से पहले शहर के कई प्रमुख इलाकों में कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं के पुराने बयानों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है, जिनके माध्यम से कांग्रेस की विश्वसनीयता और गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए गए हैं।

राजधानी दिल्ली के अशोका रोड, रेल भवन, ली मेरिडियन गोलचक्कर समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे पोस्टरों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना दिया। पोस्टरों में कांग्रेस पर अपने सहयोगी दलों के साथ विश्वासघात करने और गठबंधन की राजनीति को कमजोर करने के आरोप लगाए गए हैं।

इन पोस्टरों का उद्देश्य यह संदेश देना प्रतीत होता है कि इंडी गठबंधन के भीतर शामिल दलों के बीच वैचारिक और राजनीतिक मतभेद अब भी मौजूद हैं और कांग्रेस को लेकर सहयोगी दलों में पूरी सहमति नहीं है।

पोस्टरों में विभिन्न विपक्षी नेताओं के पुराने कथनों को उद्धृत (कोट) करते हुए कांग्रेस और उसके नेतृत्व को घेरने का प्रयास किया गया है।

एक पोस्टर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एससीपी) के प्रमुख शरद पवार का पुराना बयान प्रकाशित किया गया है, जिसमें कहा गया था कि “राहुल गांधी में निरंतरता की कमी है।” दूसरे पोस्टर में पिनराई विजयन का बयान छापा गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “राहुल गांधी राष्ट्रीय नेता हैं, लेकिन उनमें उतनी समझ भी नहीं जितनी कांग्रेस के एक स्थानीय कार्यकर्ता में होती है।”

इसी प्रकार द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) नेता उदयनिधि स्टालिन का बयान भी पोस्टरों में शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि “कांग्रेस हमारी पीठ पर बैठकर आगे बढ़ती रही और अब उसी पीठ में छुरा घोंप दिया।” पोस्टरों में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के पुराने बयानों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें “कांग्रेस अपनी विश्वसनीयता खो रही है, हम उस पर निर्भर नहीं रह सकते” तथा “अगर कांग्रेस गठबंधन नहीं चला सकती तो मैं इसे चला सकती हूं” जैसे कथन शामिल हैं।

कुछ पोस्टरों में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के पुराने बयानों का भी संदर्भ दिया गया है, जिनके माध्यम से कांग्रेस और उसके नेतृत्व की आलोचना की गई है।

सभी पोस्टरों के नीचे एक समान नारा लिखा गया है “इंडी अलायन्स वाले जो आपस में लड़ रहे हैं, वो साथ क्या लड़ेंगे!”इस नारे के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर आपसी मतभेद इतने गहरे हैं कि वह एकजुट होकर राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ सकता। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन पोस्टरों को किस संगठन, राजनीतिक दल या व्यक्ति ने लगवाया है। पोस्टरों पर किसी संस्था या समूह का नाम भी नहीं दिया गया है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने ये पोस्टर नहीं देखे हैं, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे।

इंडी गठबंधन की बैठक से पहले वामपंथी दलों की ओर से भी कांग्रेस के प्रति असंतोष के संकेत मिले हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि बैठक में शामिल होने वाले दलों की संख्या और एजेंडा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि वाम दलों के अपने राजनीतिक मुद्दे हैं, जिन्हें वे बैठक में मजबूती से उठाएंगे। डी. राजा ने यह भी आरोप लगाया कि केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने वाम दलों की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे, जिससे दोनों पक्षों के रिश्तों में तनाव पैदा हुआ।

इंडी गठबंधन की यह बैठक आगामी चुनावों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार इसमें लगभग 23 राजनीतिक दलों के शामिल होने की संभावना है। बैठक में आगामी चुनावी रणनीति, विभिन्न राज्यों में सीटों के बंटवारे, साझा कार्यक्रम और विपक्षी एकता को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैठक से पहले सामने आए ये पोस्टर विपक्षी एकजुटता की छवि को चुनौती देने का प्रयास हैं। ऐसे समय में जब इंडी गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, सहयोगी दलों के पुराने बयानों को लेकर उठी यह बहस गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। हालांकि बैठक में शामिल दलों की चर्चा और फैसले ही तय करेंगे कि विपक्ष आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना किस तरह करता है।----------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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