
नई दिल्ली, 08 जून (हि.स.)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले सुखेंदु शेखर राय ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण पार्टी नेतृत्व जनता से पूरी तरह कट गया और संगठन में पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह भ्रष्ट तथा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को बढ़ावा दिया गया।
राय ने सोमवार को दिए इस्तीफे में पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 15 वर्षों के शासन की आलोचना करते हुए कहा कि हाल में सम्पन्न विधानसभा चुनाव में जनता ने अभूतपूर्व मतदान कर सत्ता परिवर्तन का निर्णय लिया, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने चुनावी पराजय के कारणों का गंभीरता से विश्लेषण तक नहीं किया।
उन्होंने कहा कि सत्ता के लंबे दौर ने पार्टी नेताओं को आम लोगों से दूर कर दिया। पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक आम नागरिकों की पहुंच मुश्किल हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक संघर्ष कर संगठन को मजबूत किया, उन्हें हाशिये पर धकेल दिया गया और उनकी जगह बिचौलियों, भ्रष्ट तत्वों तथा आपराधिक छवि वाले लोगों को महत्व दिया गया।
राय ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और जनप्रतिनिधियों की संपत्तियों में असामान्य वृद्धि देखने को मिली। जनता के बीच इसको लेकर व्यापक असंतोष था।
उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। बड़ी संख्या में नागरिक, चिकित्सक और विभिन्न वर्गों के लोग सड़कों पर उतरे, लेकिन सरकार और सत्तारूढ़ दल ने जनता की भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया। जनता ने जिस विश्वास के साथ सत्ता सौंपी थी, उसी जनता ने बाद में सत्ता से बाहर का रास्ता भी दिखाया।
उन्होंने नई सरकार से पिछले पांच वर्षों के दौरान अस्पतालों में हुई खरीद प्रक्रियाओं तथा विभिन्न स्तरों के जनप्रतिनिधियों और नेताओं की संपत्तियों की जांच कराने की मांग की। भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
राय ने कहा कि सत्ता के अहंकार में यह मान लिया गया था कि कोई चुनौती नहीं दे सकता, लेकिन लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और जनता ने अपना फैसला सुना दिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर