
कोलकाता, 01 जुलाई (हि.स.)। कोलकाता के उद्यमी, खोजी यात्री और एंड्योरेंस रनर राम गोपाल कोठारी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। भौगोलिक उत्तरी ध्रुव पर पूर्ण मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय बनने के बाद अब उन्होंने चिली के ईस्टर आइलैंड (रापा नुई) में आयोजित प्रतिष्ठित वोल्केनो मैराथन पूरी कर इतिहास रच दिया है। वह इस मैराथन को पूरा करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।
42.195 किलोमीटर लंबी इस मैराथन का आयोजन अंतरराष्ट्रीय संस्था रनबुक ने किया, जो दुनिया के सबसे कठिन और दुर्गम स्थानों पर मैराथन आयोजित करने के लिए जानी जाती है। इस उपलब्धि के साथ कोठारी रनबुक की दोनों प्रतिष्ठित मैराथन—नॉर्थ पोल मैराथन और वोल्केनो मैराथन—पूरी करने वाले पहले भारतीय भी बन गए हैं। कोठारी ने कोलकाता से मुंबई, इस्तांबुल और सैंटियागो होते हुए करीब 24,000 किलोमीटर की यात्रा कर दुनिया के सबसे अलग-थलग बसे द्वीपों में से एक ईस्टर आइलैंड तक पहुंच बनाई। यह उनके जीवन का 80वां देश भी रहा।
आधिकारिक परिणामों के अनुसार फुल मैराथन के लिए 21 धावकों ने पंजीकरण कराया था, जबकि 20 धावकों ने दौड़ पूरी की। एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और ओशिनिया के प्रतिभागियों के बीच कोठारी ने 5 घंटे 5 मिनट 8 सेकंड में मैराथन पूरी करते हुए सातवां स्थान हासिल किया। मैराथन का शुरुआती 21 किलोमीटर लगातार चढ़ाई और उतराई वाले पक्के रास्तों पर था, जहां खुले में घूमते घोड़े और मवेशी भी चुनौती बने। इसके बाद का हिस्सा ज्वालामुखीय चट्टानों और कठिन ट्रेल्स से होकर गुजरा, जहां कई जगह इतनी तीखी चढ़ाई थी कि चलना भी मुश्किल हो गया।
करीब 30वें किलोमीटर पर धावकों को ओरोंगो ज्वालामुखी क्रेटर तक लगभग 600 मीटर की ऊंचाई तक चढ़ना पड़ा। तकनीकी ट्रैक पर कई धावक फिसले, जबकि पूरे मार्ग में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। कोठारी ने पूरी मैराथन बिना किसी मांसपेशी में ऐंठन या चोट के पूरी की। उन्होंने इसका श्रेय महीनों की कठिन तैयारी को दिया। उन्होंने एक बयान में कहा, ऐसा लग रहा था जैसे मैं मैराथन नहीं दौड़ रहा, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े खुले संग्रहालय के बीच से गुजर रहा हूं। हर किलोमीटर पर एक नया और अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने लंबी दूरी की दौड़, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, ट्रेडमिल पर ऊंचाई वाले वॉक और साल्ट लेक स्टेडियम में लगातार रैंप रनिंग की। कोलकाता की भीषण गर्मी और उमस में अभ्यास के दौरान एक बार वह गंभीर रूप से बीमार भी पड़ गए थे और चार दिन तक बिस्तर पर रहे, लेकिन इसके बाद फिर अभ्यास शुरू किया। कोठारी ने वोल्केनो मैराथन को दुनिया के सबसे सुंदर मैराथन मार्गों में से एक बताया। प्रशांत महासागर का नीला विस्तार, हरी-भरी घाटियां, ज्वालामुखीय पहाड़ियां, खुले में घूमते घोड़े और विश्व प्रसिद्ध मोआई प्रतिमाएं इस दौड़ को यादगार बनाती हैं।
राम गोपाल कोठारी ने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ खेल नहीं, बल्कि संघर्ष और सपनों की कहानी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कोलकाता में एस्बेस्टस की छत वाले एक छोटे से कमरे से जीवन की शुरुआत की थी और आज सातों महाद्वीपों के 80 देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने युवाओं के लिए संदेश देते हुए कहा, आपकी शुरुआत आपकी मंजिल तय नहीं करती। अनुशासन, मेहनत और बड़े सपने देखने का साहस आपको दुनिया के सबसे असाधारण स्थानों तक पहुंचा सकता है।
वोल्केनो मैराथन के बाद कोठारी अब अपनी दक्षिण अमेरिका यात्रा के दौरान माचू पिच्चू, रेनबो माउंटेन और सेक्रेड वैली का भी दौरा करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे