
ऑकलैंड, 11 जुलाई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित 'किया ओरा मोदी' कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रवासी भारतीयों से भारत और न्यूजीलैंड के बीच मित्रता, विश्वास और सहयोग का सशक्त सेतु बने रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक प्रवासी भारतीयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का कार्यक्रम में शामिल होने तथा भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय संबंधों और भारतीय मूल के लोगों के कल्याण के प्रति उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने भारतीय समुदाय द्वारा दिए गए आत्मीय स्वागत की भी सराहना की।
मोदी ने कहा कि न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय अपनी मेहनत, लगन और संकल्प के बल पर देश के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीयों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत, त्योहारों और परंपराओं को सहेजते हुए न्यूजीलैंड की बहुसांस्कृतिक पहचान को भी समृद्ध किया है। उन्होंने सेवा भावना की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय समुदाय स्वयंसेवा, परोपकार और सामाजिक कल्याण के कार्यों में अनुकरणीय भूमिका निभा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन केवल भारतीय समुदाय का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत और न्यूजीलैंड की मित्रता, खेल संबंधों तथा आर्थिक साझेदारी का उत्सव है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2026 दोनों देशों के बीच खेल सहयोग के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है और दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने न्यूजीलैंड की माओरी संस्कृति की समावेशी और सतत विकास की भावना की सराहना करते हुए कहा कि भारत भी अपनी विकास यात्रा में विरासत और आधुनिक विकास के संतुलन को प्राथमिकता दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों से भारत और न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और जन-जन के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है तथा साझा समृद्धि के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा, “भारतीय देश से बाहर जिस भी देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में पूरी तरह मदद करते हैं। और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं। हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।”
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार