

हैदराबाद, 13 जुलाई (हि.स.)। तेलंगाना की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक 'आषाढ़ मास बोनालू जात्रा' का शुभारंभ 16 जुलाई को गोलकोंडा स्थित श्री जगदंबा महाकाली मंदिर से होगा। लगभग एक माह तक चलने वाला यह पारंपरिक लोक उत्सव 13 अगस्त तक ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र के 3,427 मंदिरों में मनाया जाएगा। राज्य सरकार ने आयोजन के लिए 15.05 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
उत्सव की तैयारियों की समीक्षा के लिए सोमवार को हैदराबाद के प्रभारी मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जाएं और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाया जाए।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से विभिन्न प्रमुख मंदिरों में पारंपरिक रूप से रेशमी वस्त्र (पट्टु वस्त्रलु) अर्पित किए जाएंगे। गोलकोंडा, सिकंदराबाद के श्री उज्जैनी महाकाली मंदिर, चिलकलगुडा, हरिबोली, कारवां, लाल दरवाजा, चारमीनार, मीरआलम मंडी सहित शहर के लगभग 30 प्रमुख मंदिरों में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। उत्सव का समापन पारंपरिक फलाहारम बंडला (प्रसाद की गाड़ियों की शोभायात्रा) के साथ होगा।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को श्रद्धालुओं के लिए कतार प्रबंधन, पेयजल, स्वच्छता, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, सड़कों की मरम्मत, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था, सजावटी प्रकाश व्यवस्था और पुष्प सज्जा सहित सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए।
बोनालू उत्सव का प्रमुख कार्यक्रम
16 जुलाई – श्री जगदंबा महाकाली मंदिर, गोलकोंडा में बोनालू उत्सव का शुभारंभ।20 से 22 जुलाई – बालकाम्पेट येलम्मा कल्याणम उत्सव।20 जुलाई – एदुरकोलू उत्सवम।21 जुलाई – अम्मानवारी कल्याणम।22 जुलाई – रथोत्सवम।2 अगस्त – सिकंदराबाद स्थित श्री उज्जैनी महाकाली मंदिर में बोनालू।3 अगस्त – रंगम कार्यक्रम।9 अगस्त – लाल दरवाजा सिंहवाहिनी अम्मावारी बोनालू तथा शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन।
उल्लेखनीय है कि बोनालू तेलंगाना का प्रमुख लोक एवं धार्मिक पर्व है, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के कार्यकाल में राजकीय त्योहार का दर्जा दिया गया था। आषाढ़ मास के दौरान प्रत्येक रविवार को देवी महाकाली और देवी दुर्गा के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर सजे हुए कलश (बोनम) लेकर माता को अर्पित करते हैं।
विशेष रूप से सिकंदराबाद स्थित श्री उज्जैनी महाकाली मंदिर का बोनालू उत्सव पूरे तेलंगाना में सबसे अधिक प्रसिद्ध माना जाता है। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और हजारों श्रद्धालु परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। बोनालू उत्सव को तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान और लोक आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj