हिंसा नहीं, संसद से सड़क तक बुलंद करेंगे अपनी आवाजः प्रिया सरोज

14 Jul 2026 19:52:53
समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद प्रिया सरोज


नई दिल्ली, 14 जुलाई (हि.स.)। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद प्रिया सरोज ने मंगलवार को कहा कि हमें नफरत और हिंसा का जबाव हिंसा या नफरत से देने के बजाय संसद से सड़क तक अपनी आवाज बुलंद करनी है। वह सदन के भीतर और बाहर छात्रों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रहेंगी।

प्रिया सरोज ने यह बात जंतर- मंतर पर चल रहे सोशल मीडिया अभियान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान कही। आंदोलन को समर्थन देने पहुंचीं प्रिया सरोज ने पत्रकार वार्ता के दौरान छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, जब देश का युवा बार-बार रोने लगे, तो समझो देश बीमार हो जाता है। हमें नफ़रत नहीं, गुस्सा दिखाना है, हिंसा नहीं, संसद से सड़क तक अपनी आवाज बुलंद करनी है। वह सदन के भीतर और बाहर उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ती रहेंगी।

इस दौरान परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए युवाओं ने सरकार के समक्ष 5 बड़ी मांगें रखी हैं।

पहली सख्त और पारदर्शी नया परीक्षा कानून आए। इसमें संगठित पेपर लीक के मामलों में सजा को 3 साल से बढ़ाकर 10 साल किया जाए। सरकारी अधिकारियों पर हो कार्रवाई हो।

जवाबदेही तय हो और 'छात्र लोकपाल' बने। यदि किसी विभाग में पेपर लीक होता है, तो संबंधित मंत्री को संसद सत्र के दौरान 14 दिनों के भीतर सदन में मौखिक बयान देना होगा। सत्र न होने पर लिखित बयान और संवाददाता सम्मेलन करनी होगी।

पेपर लीक होते ही ऑटोमैटिक जांच शुरू हो। पांच सदस्यीय कमेटी (जिसकी अध्यक्षता रिटायर्ड उच्चतम न्यायालय के जज करें) 30 दिनों के भीतर दोषियों के नाम उजागर करें और अगले 30 दिनों में उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

केवल छात्रों के मुद्दों के लिए एक लोकपाल बने, जिसके पास खुद संज्ञान लेने, दोबारा-एग्जाम कराने और मुआवजा दिलाने की शक्तियां हों।

परीक्षा कराने वाली कंपनियों का राष्ट्रीय स्तर पर ऑडिट हो और दागी वेंडर्स को तुरंत काली सूची में डाला जाए।

एनटीए को भंग कर 'नेशनल टेस्टिंग कमीशन' का गठन हो।

कर्मचारी चयन आयोग के लिए सालाना परीक्षा कैलेंडर अनिवार्य हो और नोटिफिकेशन से लेकर जॉइनिंग तक की प्रक्रिया एक साल में पूरी की जाए।

अधिकार और फीस पर लगाम लगे। इसमें पेपर लीक होने पर छात्रों की फीस तुरंत वापस हो और मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना के लिए हर कैंडिडेट को निश्चित मुआवजा मिले। छात्रों को उनके गृह राज्य में ही परीक्षा केंद्र दिया जाए।

सभी प्राइवेट मेडिकल और प्रोफेशनल कॉलेजों की 50 प्रतिशत सीटों पर फीस उतनी ही हो, जितनी उस राज्य के सरकारी कॉलेजों में होती है। साथ ही कोर्स के बीच में सरकारी कॉलेजों द्वारा फीस बढ़ाने पर रोक लगे।

'एस्पिरेंट वेलफेयर फंड' और 12 साल का श्वेत पत्र जारी करें। इसमें परीक्षा के तनाव या पेपर लीक के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारों की आर्थिक मदद के लिए 'नेशनल एस्पिरेंट वेलफेयर फंड' बने। हर कोचिंग सेंटर में प्रोफेशनल साइकेट्रिस्ट और साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य हो।

सरकार पिछले 12 वर्षों में केंद्र और राज्य स्तर पर हुए सभी पेपर लीक, प्रभावित छात्रों और दोषियों को मिली सजा पर एक श्वेत पत्र जारी करे। संसद में शिक्षा के मुद्दों पर एक अलग स्थायी समिति का गठन किया जाए।

प्रतिनिधिमंडल छात्रों से मुलाकात के लिए समय दे-

अभिजीत ने बताया कि उन्होंने 9 एवं 10 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित देश के कई प्रमुख राजनेताओं को व्यक्तिगत पत्र भेजे हैं। इन पत्रों के जरिए दो मुख्य अनुरोध किए गए हैं। पहला नेतागण बिना अपनी पार्टी के झंडे, बैनर या लोगो के जंतर-मंतर पर आएं और आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता दिखाएं। दूसरा सत्ता पक्ष (भाजपा) का एक छोटा प्रतिनिधिमंडल छात्रों से मुलाकात के लिए समय दे।

उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित 'शांतिपूर्ण मार्च' में शामिल होने के लिए कल एक मिस कॉल नंबर (7011670115) जारी किया गया था। इसमें अब तक लगभग 1,03,000 (एक लाख तीन हजार) से अधिक लोगों ने मिस कॉल कर इस मार्च में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की है।

दीपके ने देश के सभी सामाजिक संगठनों, किसान संगठनों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे 20 जुलाई को अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली के जंतर-मंतर पहुँचकर इस निर्णायक लड़ाई में युवाओं का साथ दें।

उल्लेखनीय है कि विभिन्न मुद्दों और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन जारी है। विपक्ष के कई नेताओं का इस आंदोलन को समर्थन मिल रहा है।

वहीं, 17 दिन से अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक और यहां एकत्रित छात्र समूह का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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