छत्तीसगढ़ में पीएमकेकेकेवाई और जिला खनिज न्यास निधि के क्रियान्वयन में अनियमितताएं

14 Jul 2026 22:32:53

- सीएजी ने उठाए गंभीर सवाल

रायपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) तथा जिला खनिज न्यास निधि (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट-डीएमएफटी) के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

मंगलवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा के पटल पर रखे गए लेखा परीक्षा में निधियों के प्रबंधन, परियोजनाओं की योजना एवं क्रियान्वयन, खरीद प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था तथा पारदर्शिता से जुड़ी कई कमियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों एवं वहां के लोगों के कल्याण के लिए निर्धारित निधियों का उपयोग निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप नहीं किया गया।

लेखा परीक्षा में पाया गया कि परीक्षण के लिए चयनित जिलों में जिला खनिज न्यास निधि नियमों का व्यापक उल्लंघन किया गया। वार्षिक बजट एवं वार्षिक कार्ययोजना तैयार किए बिना ही न्यास निधियों का उपयोग किया गया। इसके अलावा, जुलाई 2021 में भारत सरकार द्वारा जारी निर्देशों के विपरीत 1.68 करोड़ रुपये राज्य स्तरीय जिला खनिज न्यास प्रकोष्ठ को हस्तांतरित किए गए, जबकि मार्च 2024 तक 10.82 करोड़ रुपये की राशि राज्य स्तरीय प्रकोष्ठ के पास लंबित रही।

रिपोर्ट के अनुसार न्यासों द्वारा उपलब्ध निधियों का 4,536.58 करोड़ रुपये (81 प्रतिशत) व्यय किए जाने के बावजूद खनन प्रभावित क्षेत्रों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल सका। परीक्षण के लिए चयनित 11 जिलों के 1,734 प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांवों में से 754 गांव (44 प्रतिशत) विभिन्न विकास कार्यों से वंचित रहे। लेखा परीक्षा में यह भी पाया गया कि प्रभावित लोगों के लिए दीर्घकालिक एवं सतत आजीविका सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक मास्टर प्लान, विजन दस्तावेज तथा वार्षिक योजनाएं तैयार किए बिना ही निधियों का उपयोग किया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिला खनिज न्यासों के गठन के बाद खनन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में पांच से 65 माह तक की देरी हुई। प्रभावित क्षेत्रों की औपचारिक पहचान किए बिना ही 1,060.70 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत कर दिए गए। इसके अलावा, प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांवों की सूची जिला कलेक्टरों द्वारा कार्यालयीन आदेश के माध्यम से जारी की गई, जबकि नियमों के अनुसार इसकी विधिवत अधिसूचना जारी किया जाना आवश्यक था।

लेखा परीक्षा में पाया गया कि अपर्याप्त योजना, कमजोर निगरानी और समुचित परीक्षण के अभाव के कारण 41.80 करोड़ रुपये का व्यय निष्प्रभावी सिद्ध हुआ। इस राशि से किए गए कई कार्य अधूरे रह गए अथवा निर्मित परिसंपत्तियां उपयोग में नहीं आ सकीं। इनमें कला एवं संस्कृति केंद्र, बायोगैस आधारित विद्युत उत्पादन संयंत्र, पोल्ट्री इकाइयां तथा मशरूम उत्पादन केंद्र जैसी परिसंपत्तियां शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति योजना के क्रियान्वयन में गंभीर कमियों को दर्शाती है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 30.73 करोड़ रुपये की न्यास निधि का उपयोग विभिन्न शासकीय कार्यालयों के निर्माण, मरम्मत, सौंदर्यीकरण एवं सामग्री क्रय जैसे कार्यों पर किया गया, जबकि ये कार्य प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल नहीं थे।

खरीद प्रक्रिया की समीक्षा में लेखा परीक्षा ने पाया कि क्रियान्वयन एजेंसियों ने 17.49 करोड़ रुपये की सामग्री एवं सेवाओं की खरीद खुली निविदा आमंत्रित किए बिना सीमित कोटेशन के आधार पर की। इसके अलावा 38.82 करोड़ रुपये की खरीद तकनीकी विनिर्देश निर्धारित किए बिना की गई, जो छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, 2002 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी।

निगरानी व्यवस्था की समीक्षा में सीएजी ने पाया कि राज्य स्तरीय निगरानी समिति तथा राज्य स्तरीय समीक्षा समिति की बैठकें निर्धारित अवधि के अनुसार आयोजित नहीं की गईं। परीक्षण के लिए चयनित 12 जिलों की वेबसाइटों की जांच में पाया गया कि न्यासों की संरचना, खनन प्रभावित क्षेत्रों की सूची, प्राप्त अंशदान का विवरण, स्वीकृत एवं प्रगति पर कार्यों की स्थिति, वार्षिक योजना, बजट तथा बैठकों के कार्यवृत्त जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां या तो वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थीं अथवा अद्यतन नहीं की गई थीं। रिपोर्ट में कुशल मानव संसाधनों की कमी का भी उल्लेख किया गया है। बेमेतरा और महासमुंद जिलों में सभी स्वीकृत पद रिक्त पाए गए, जबकि बालोद, बिलासपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव जिलों में प्रमुख पदों के 50 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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