
वाराणसी, 14 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर भक्तों के प्रेम में अत्यधिक स्नान (जलाभिषेक) से प्रतीक रूप से बीमार हुए भगवान जगन्नाथ 14 दिनों तक आराम के बाद मंगलवार को स्वस्थ हो गए। अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में सुबह मंदिर का पट खुलते ही भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रभु की मंगला आरती के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान के काष्ठ विग्रह के समक्ष भोग, फल एवं फूल अर्पित कर घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके पहले मंदिर के महंत राधेश्याम पांडेय ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की मौजूदगी में भगवान जगन्नाथ के विग्रह को पंचामृत से स्नान करा कर श्वेत परिधान धारण कराया एवं फूल मालाओं से शृंगार कर भव्य मंगला आरती की। सुबह 5 बजे मंगला आरती के बाद मंदिर में जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ दर्शन पूजन का क्रम शुरू हुआ। सुबह ही भगवान को पहला पथ्य परवल का जूस भोग रूप में चढ़ाया गया।
मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटी। श्रद्धालु नाथों के नाथ भगवान जगन्नाथ का दर्शन पाकर निहाल हुए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के जय घोष से गुंजायमान रहा। मंदिर में पूर्वाह्न साढ़े 10 बजे भगवान जगन्नाथ को पंच भोग लगाया गया। दोपहर 12 बजे मंदिर का पट बंद हुआ। इसके बाद दोपहर तीन बजे फिर खुलेगा। फिर दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हो जाएया। मंदिर में रात 8 बजे संध्या आरती और 9 बजे शयन आरती के बाद मंदिर बंद कर दिया जाएगा।
मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय के अनुसार बुधवार, 15 जुलाई को भगवान डोली पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके साथ ही 16 जुलाई से काशी की विश्वप्रसिद्ध तीन दिवसीय रथयात्रा मेले की शुरूआत होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी