
नई दिल्ली, 14 जुलाई (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को कहा कि संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला है तथा मजबूत संस्थाओं और न्याय व्यवस्था का आधार संस्थागत ईमानदारी, संवैधानिक अनुशासन और जनता का विश्वास है।
उपराष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. आर. गवई के भाषणों, व्याख्यानों और विचारों के संकलन पर आधारित पुस्तक 'द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स' का विमोचन किया। प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार द्वारा संपादित इस पुस्तक का प्रकाशन थॉमसन रॉयटर्स ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (सी.एल.ई.ए.) के सहयोग से किया है।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक न्यायिक चिंतन, संवैधानिक अनुशासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें संविधानवाद, विधि के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से जुड़े विचारों का समृद्ध संकलन है, जो भारत में संवैधानिक विमर्श और विधिक अध्ययन को नई दिशा देगा।
उन्होंने कहा कि पुस्तक में भारतीय संविधान को एक जीवंत और निरंतर विकसित होने वाले दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसने पिछले 75 वर्षों में निरंतरता और परिवर्तन, अधिकार और जवाबदेही तथा अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि संसद को संविधान संशोधन का अधिकार होने के कारण देश समय की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालने में सक्षम रहा है।
राधाकृष्णन ने कहा कि न्यायपालिका संवैधानिक शासन की रक्षा करने और विधि के शासन में नागरिकों के विश्वास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में अधिकार के साथ संयम भी उतना ही आवश्यक है और मजबूत संस्थाएं तथा न्याय, दोनों ही संस्थागत ईमानदारी, संवैधानिक अनुशासन, जनविश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से ही कायम रहते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक शासन को आम नागरिकों की आकांक्षाओं और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाना प्रत्येक व्यक्ति के लिए गरिमा, अवसर और आशा सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम है।
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन और न्याय तक समान पहुंच के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है।
अंत में उपराष्ट्रपति ने विधि समुदाय से आह्वान किया कि वे समय-समय पर सबसे गरीब और जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराएं, ताकि न्याय वास्तव में सभी के लिए सुलभ बन सके।
समारोह में देश के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. आर. गवई, कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं संपादक प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार, थॉमसन रॉयटर्स के प्रकाशक गौरी शंकर नटेशन तथा विधि जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार