
कोलकाता, 14 जुलाई (हि.स.)। करीब 20 वर्षों बाद चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन पश्चिम बंगाल लौटने जा रही हैं। वह आगामी एक अगस्त को कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। कार्यक्रम का आयोजन कई सामाजिक संगठनों की ओर से किया जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के साथ-साथ राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को भी आमंत्रित किया गया है।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में तसलीमा नसरीन की रचनाओं, कविताओं और गीतों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। कार्यक्रम के प्रमुख आयोजक मोहित राय ने कहा कि तसलीमा के पश्चिम बंगाल आने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। उनका आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकारों ने कट्टरपंथी दबाव के कारण उन्हें राज्य में आने की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूरी तरह सांस्कृतिक है और इसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।
मोहित राय ने बताया कि तसलीमा नसरीन की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार से आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन मिला है। सुरक्षा के मद्देनजर विशेष इंतजाम किए जाएंगे।
इस कार्यक्रम के सह-आयोजक संगठन सेक्युलर मिशन के प्रतिनिधियों ने भी तसलीमा नसरीन के आगमन का स्वागत किया है। संगठन से जुड़े अधिवक्ता उस्मान मलिक ने साेशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि लंबे इंतजार के बाद तसलीमा नसरीन का कोलकाता आगमन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कट्टरवाद के विरोध की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षण होगा।
दरअसल, वर्ष 2007 में तसलीमा नसरीन की पुस्तक ‘द्विखंडित’ को लेकर कोलकाता के कई इलाकों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। स्थिति तनावपूर्ण होने पर प्रशासन को सेना की सहायता लेनी पड़ी थी। उस समय राज्य में वाम मोर्चा सरकार थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया गया था। बाद में तसलीमा नसरीन को कोलकाता छोड़ना पड़ा।
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी उनकी राज्य में वापसी नहीं हो सकी। अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद लगभग दो दशक बाद उनका पश्चिम बंगाल आगमन होने जा रहा है।
तसलीमा नसरीन की प्रस्तावित यात्रा को साहित्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, कार्यक्रम के आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह सांस्कृतिक आयोजन है और इसे किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर