सूरज की रोशनी से ऊर्जा संजोने वाले स्मार्ट मैटेरियल विकसित कर रहे आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिक

15 Jul 2026 17:58:53
jodhpur


- दृश्य प्रकाश से संचालित नई तकनीक से ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट खिड़कियों और स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को मिलेगी नई दिशा

जोधपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के वैज्ञानिक सूर्य की दृश्य रोशनी से ऊर्जा संजोने वाले स्मार्ट पदार्थ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं। यह शोध भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट उपकरणों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास में नई संभावनाएं खोल सकता है।

संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. मोनिका गुप्ता के नेतृत्व में फंक्शनल ऑर्गेनिक मैटेरियल्स प्रयोगशाला में शोधकर्ताओं की टीम ऐसे विशेष कार्बनिक पदार्थ विकसित कर रही है, जो सूर्य के दृश्य प्रकाश के संपर्क में आने पर अपने गुण बदलकर ऊर्जा का प्रभावी भंडारण और उपयोग कर सकें। वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में अधिकांश स्मार्ट पदार्थ केवल पराबैंगनी किरणों पर कार्य करते हैं, जबकि सूर्य के प्रकाश का सबसे बड़ा हिस्सा दृश्य प्रकाश होता है। इसी कारण इनकी उपयोगिता सीमित रहती है। आईआईटी जोधपुर का शोध ऐसे पदार्थ विकसित करने पर केंद्रित है, जो सीधे दृश्य प्रकाश में सक्रिय होकर अधिक दक्षता और व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित करें।

शोध की प्रमुख उपलब्धियों में दृश्य प्रकाश से संचालित मॉलिक्यूलर फोटोस्विच का विकास शामिल है। ये सूक्ष्म अणु प्रकाश मिलने पर अपनी संरचना बदल लेते हैं। अब तक ऐसे अणु केवल पराबैंगनी प्रकाश में सक्रिय होते थे, लेकिन नए शोध के माध्यम से इन्हें सामान्य सूर्य प्रकाश में भी प्रभावी ढंग से कार्य करने योग्य बनाया जा रहा है। शोधकर्ता इन अणुओं को द्रव क्रिस्टल आधारित पदार्थों के साथ जोडक़र ऐसे स्मार्ट पदार्थ भी विकसित कर रहे हैं, जो सूर्य की रोशनी पडऩे पर अपने प्रकाशीय और यांत्रिक गुण बदल सके।

भविष्य में इनका उपयोग स्मार्ट खिड़कियों, स्वयं परिस्थितियों के अनुसार बदलने वाले प्रकाशीय उपकरणों, प्रकाश संचालित मशीनों, स्मार्ट परतों, उन्नत प्रकाशीय प्रणालियों तथा नई पीढ़ी के ऊर्जा उपकरणों में किया जा सकेगा। शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मॉलिक्यूलर सोलर थर्मल फ्यूल तकनीक भी है। इसके माध्यम से सूर्य की ऊर्जा को रासायनिक रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और आवश्यकता पडऩे पर उसे ऊष्मा के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। वैज्ञानिक ऐसे पदार्थ विकसित कर रहे हैं, जो अधिक ऊर्जा संग्रहित करने, लंबे समय तक सुरक्षित रखने और नियंत्रित तरीके से वापस उपलब्ध कराने में सक्षम हों। यह तकनीक अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में भी प्रभावी साबित हो सकती है।

डॉ. मोनिका गुप्ता ने बताया कि प्रकृति प्रतिदिन प्रचुर मात्रा में सूर्य प्रकाश उपलब्ध कराती है, लेकिन वर्तमान तकनीकें उसका पूरा उपयोग नहीं कर पातीं, क्योंकि वे पराबैंगनी प्रकाश पर निर्भर हैं। उनका प्रयास ऐसे स्मार्ट पदार्थ विकसित करना है, जो सीधे दृश्य प्रकाश में कार्य कर वास्तविक परिस्थितियों में सौर ऊर्जा का प्रभावी भंडारण और उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि शोध के सफल होने पर भविष्य में ऐसी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों का विकास संभव होगा, जिनमें सूर्य की रोशनी उपलब्ध नहीं होने पर भी पहले से संग्रहित ऊर्जा का उपयोग किया जा सकेगा।----------------------

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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