चुनाव जीतने से ज्यादा जनता की सेवा करना अधिक महत्वपूर्ण : उपराष्ट्रपति

15 Jul 2026 20:05:53
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के साथ उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन।


जयपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र तभी सशक्त होता है, जब विचार-विमर्श गरिमा के साथ हो और हर मतभेद से ऊपर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की सेवा करना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। मतों से चुनाव जीते जा सकते हैं, लेकिन जनता का स्थायी सम्मान और विश्वास केवल ईमानदार जनसेवा से ही अर्जित होता है।

उपराष्ट्रपति बुधवार को राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित 'विधायी गौरव यात्रा : पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों के कॉन्क्लेव' के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राजस्थान की बलिदान, शौर्य और देशभक्ति की गौरवशाली परंपरा को नमन करते हुए कहा कि राज्य की प्रत्येक पीढ़ी ने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जनता और संविधान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता सभी की समान जिम्मेदारी है। बहस, चर्चा और आवश्यकता पड़ने पर व्यवधान भी अंततः किसी सार्थक निर्णय तक पहुंचने चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा में नहीं, बल्कि बहस की गुणवत्ता, आचरण की मर्यादा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता में निहित है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इन आदर्शों को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।

उन्होंने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की सराहना करते हुए कहा कि पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की यह पहल संस्थागत स्मृतियों को संरक्षित करने के साथ युवा जनप्रतिनिधियों को वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करती है।

लोकसभा सदस्य के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसदीय समितियों की सिफारिशें दूरगामी नीतिगत बदलाव का आधार बन सकती हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से समितियों के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने तिरुक्कुरल का उल्लेख करते हुए कहा कि जो जनप्रतिनिधि सहज उपलब्ध रहते हैं और विनम्र व्यवहार करते हैं, वे जनता का स्थायी विश्वास अर्जित करते हैं। नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना और सम्मानपूर्वक व्यवहार करना अच्छी नीतियां बनाने जितना ही महत्वपूर्ण है।

उपराष्ट्रपति ने राज्य विधानसभाओं को भारतीय लोकतंत्र की जीवंत धड़कन बताते हुए कहा कि संसद जहां राष्ट्र की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं राज्य विधानसभाएं गांव, कस्बों और आम नागरिकों की आशाओं एवं अपेक्षाओं को स्वर देती हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधायक पर लोकतंत्र में जनता के विश्वास को बनाए रखने की जिम्मेदारी है। यह विश्वास ईमानदारी, विनम्रता और निरंतर जनसेवा के माध्यम से ही कायम रखा जा सकता है।

अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के लोकतांत्रिक योगदान का उल्लेख किया। साथ ही लोकसभा सदस्य के रूप में स्वर्गीय राजेश पायलट के साथ अपने आत्मीय संबंधों को भी याद किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन धैर्य और समर्पण की मांग करता है। उन्होंने महाराणा प्रताप और उनके अश्व चेतक के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास समर्पण और निष्ठा को सदैव याद रखता है। श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों से फल की चिंता किए बिना कर्तव्य पालन का आह्वान किया। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से विधायी संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने, रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ईमानदारी, विनम्रता और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित राजस्थान, विकसित भारत का अभिन्न अंग है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्षों, पूर्व उपाध्यक्षों तथा पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों को राज्य की लोकतांत्रिक एवं विधायी परंपरा में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित अनेक पूर्व एवं वर्तमान विधायक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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