नेपाल और भारत अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्गों पर फिर से वार्ता शुरू करने पर सहमत

17 Jul 2026 13:14:53
नेपाल के विदेश मंत्री और भारत के अतिरिक्त सचिव


काठमांडू, 17 जुलाई (हि.स.)। नेपाल और भारत अतिरिक्त द्विपक्षीय हवाई प्रवेश मार्गों पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए सहमत हो गए हैं। लगभग एक दशक बाद पोखरा और भैरहवा में नेपाल के दो नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के संचालन के लिए यह वार्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्ग लंबे समय से नेपाल की एक प्रमुख मांग रहे हैं, क्योंकि वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सिमरा के ऊपर एक ही भीड़भाड़ वाले प्रवेश बिंदु (एंट्री पॉइंट) से देश में प्रवेश करती हैं। भारत ने नेपाल के पश्चिमी और पूर्वी गलियारों से सीधे, कम ऊंचाई वाले प्रवेश मार्ग अब तक नहीं दिया है। भारत ने इसके लिए गोरखपुर हवाई अड्डे (एयर बेस) सहित संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों से संबंधित सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ हवाई यातायात प्रबंधन की जटिलताओं का हवाला दिया है।

दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त सीमा पार हवाई प्रवेश मार्गों पर चर्चा और बातचीत के लिए अगस्त में मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बैठक की तारीख और स्थान अभी तय होना बाकी है।

उच्च स्तरीय बैठक में हुई चर्चा

इस मुद्दे पर गुरुवार को काठमांडू में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और भारत के विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनु महावर के बीच एक बैठक के दौरान चर्चा हुई।

मुनु महावर ऊर्जा सचिव स्तर की 13वीं नेपाल-भारत संयुक्त संचालन समिति (ज्वाइंट स्टीयरिंग कमेटी) की बैठक में भाग लेने के लिए नेपाल में हैं, जो बुधवार को पोखरा में संपन्न हुई।

शुक्रवार को विदेश मंत्री खनाल के साथ बैठक के दौरान, खनाल ने भारत से लंबे समय से लंबित तकनीकी समिति की बैठक बुलाने का आग्रह किया, जिसका काम अतिरिक्त हवाई मार्गों के लिए नेपाल के अनुरोध पर चर्चा करना है।

खनाल के मुताबिक महावर ने आश्वासन दिया है कि बैठक अगले महीने होगी। तकनीकी स्तर का तंत्र अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्गों के लिए नेपाल के अनुरोध में आने वाली बाधाओं की समीक्षा करेगा।।

पर्यटन मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि नेपाल ने हाल ही में यह बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने बताया, अब जब भारत सहमत हो गया है, तो बैठक के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा।

नेपाल पोखरा और भैरहवा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बनाने का निर्णय लेने के बाद, साल 2009 से ही भारत से अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्गों की मांग कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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