मायावती ने संसद के मानसून सत्र के हंगामेदार होने की जताई आशंका

19 Jul 2026 17:45:53
बसपा प्रमुख मायावती की फोटो


लखनऊ, 19 जुलाई (हि.स.)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संसद के मानसून सत्र के हंगामेदार रहने की आशंका जताते हुए कहा कि राम मंदिर चढ़ावा समेत कई अहम मुद्दे सदन में उठेंगे, जिन पर पूरे देश की नजर रहेगी। उन्होंने सभी दलों से संसद का मानसून सत्र बिना किसी उत्तेजना, रोष और विद्वेष के शांतिपूर्ण एवं सुचारू ढंग से चलाने की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है।

मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर सात पॉइंट में लंबा पोस्‍ट किया। उन्होंने लिखा कि अब जबकि संसद का मानसून सत्र कल 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। एक बार फिर यह देश व आमजन की चिन्ता है कि क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जायेगा या फिर महंगाई, बेरोजगारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के पेपरलीक आदि से जुड़े देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न माहौल को शान्त करने व इनके संतोषजनक समाधान के लिए गंभीरता दिखाई जायेगी।

मायावती ने आगे लिखा कि अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा हेराफेरी व गबन आदि को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने उप्र व देश को झकझोर कर रख दिया है। लोग जवाबदेही मांग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा जरूर गर्म होगा।

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद के हालात, राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवति महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दे भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था व यहां के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करता अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध और रुपये का अवमूल्यण आदि ऐसे मुद्दे हैं जिनपर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता/वैमनस्य को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा।

मायावती ने लिखा कि देश को इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रखकर संसद के मानसून सत्र को बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के सुचारू, शान्तिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परम्परा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिये, जो वक्त की अहम जरूरत के हिसाब से सभी की जिम्मेदारी भी बनती है। इस सम्बंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास जरूर करना चाहिये कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी परेशानी/दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पायें।

बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है कि संसद को इन ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से गंभीर व संवेदनशील होना जरूरी है। इसकी शुरूआत अगर संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवरनेन्स के लिए संसद का प्रभावी होना जरूरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक

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