विक्रम-1 मिशन की सफलता पर टीडीबी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को दी बधाई, बताया निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

19 Jul 2026 13:28:53
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2022 के अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह स्काईरूट एयरोस्पेस को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पुरस्कार-2022 प्रदान करते हुए (फाइल फोटो)।


नई दिल्ली, 19 जुलाई (हि.स.)। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने विक्रम-1 मिशन की सफल उड़ान पर स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को बधाई देते हुए इसे भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। बोर्ड ने कहा कि इस सफलता से स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान और नवाचार क्षमता को नई मजबूती मिली है।

टीडीबी ने अपने बयान में कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस की यह उपलब्धि स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की पहचान, प्रोत्साहन और व्यावसायीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। बोर्ड ने वर्ष 2022 में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर स्काईरूट एयरोस्पेस को स्वदेशी प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पुरस्कार से सम्मानित किया था।

उस समय केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह पुरस्कार प्रदान किया था। स्काईरूट को छोटे उपग्रह प्रक्षेपण बाजार के लिए स्वदेशी क्रायोजेनिक, लिक्विड और सॉलिड प्रोपल्शन तकनीकों के विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया था। टीडीबी ने कहा कि विक्रम-1 मिशन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि शुरुआती चरण में संभावनाशील भारतीय स्टार्टअप की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहन देने की नीति दूरगामी और सकारात्मक परिणाम देती है।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पुरस्कार प्राप्त करने वाले एक उभरते स्टार्टअप से लेकर भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने तक का उसका सफर देश के सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि स्काईरूट एयरोस्पेस ने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) फंड के तहत टीडीबी को एक प्रस्ताव भी सौंपा है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।

बोर्ड ने कहा कि वह एयरोस्पेस, रक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीकों के विकास, व्यावसायीकरण तथा नवाचार आधारित उद्यमों को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता इस बात का प्रमाण है कि समय पर संस्थागत पहचान, नीति समर्थन और निरंतर सहयोग मिलने पर भारतीय नवाचार आधारित उद्यम वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

Powered By Sangraha 9.0