पीएमजीकेएवाई योजना के तहत अब 80 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को मिलेगा बेहतर गुणवत्ता वाला चावल

02 Jul 2026 18:00:53
पीएमजीकेएवाई के जारी लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स)। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत अब 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ज्यादा बेहतर गुणवत्ता वाले चावल का वितरण किया जाएगा।

उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में बताया कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार को मंजूरी दी है।

पीएमजीकेएवाई के तहत सप्लाई किए जाने वाले कच्चे चावल में 10 फीसदी तक टूटे हुए दाने होंगे, जो पहले के 25 फीसदी तक के नियम की जगह लेंगे। वहीं, पार्बोइल्ड चावल में 5 फीसदी तक टूटे हुए दाने होंगे, जो पहले के 16 फीसदी तक के नियम की जगह लेंगे। इस सुधार से खाद्य गुणवत्ता बढ़ेगी, परिचालन दक्षता में सुधार होगा, पारदर्शिता मजबूत होगी और सालाना लगभग 2,161 करोड़ रुपये की बचत होगी।

मंत्रालय ने कहा कि बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की खरीद तत्काल प्रभाव से शुरू होगी और खरीफ विपणन सत्र (केएमएस) 2027-28 तक सभी खरीद करने वाले राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू कर दी जाएगी। इस प्रस्ताव का पहले ही हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों में पायलट आधार पर सफल परीक्षण किया जा चुका है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि लगभग 30 वर्षों में पहली बार चावल में स्वीकार्य टूटे दानों की सीमा में कमी आएगी। कच्चे चावल में अधिकतम 10 फीसदी तथा उसना चावल में अधिकतम 5 फीसदी टूटे दानों की अनुमति होगी। पीएमजीकेएवाई के तहत 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा। वहीं, अलग किये गये टूटे चावल का उत्पादक एवं औद्योगिक उपयोग। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए चावल के बोरों पर क्यूआर-कोड आधारित अनुरेखण होगा।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि पीएमजीकेएवाई और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत बेहतर गुणवत्ता वाले चावल का वितरण भी चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिससे सभी राज्यों में संशोधित विशिष्टताओं के साथ सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित हो सके। इस सुधार के अंतर्गत चावल की बोरों पर क्यूआर-कोड टैग लगाए जाएंगे, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला में शुरू से अंत तक पता लगाना सुनिश्चित होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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