
कोलकाता, 02 जुलाई (हि.स.)। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नेतृत्व और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया। आयोग ने गुरुवार शाम ममता बनर्जी और विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को पत्र भेजकर उनके दावों और प्रतिदावों पर विस्तृत जवाब मांगा। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अपना लिखित पक्ष 06 जुलाई को शाम 5:30 बजे तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब गुरुवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिला। बैठक में ऋतब्रत गुट ने खुद को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक संगठन बताते हुए पार्टी के संगठनात्मक चुनाव, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और पार्टी पर अपने दावे से जुड़े दस्तावेज आयोग के समक्ष रखे।
बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि 22 जून को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस का विशेष संगठनात्मक अधिवेशन आयोजित किया गया था। अधिवेशन के तुरंत बाद इसकी जानकारी लिखित रूप में चुनाव आयोग को दी गई थी। उन्होंने बताया कि पहले कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को भी दस्तावेज सौंपे गए और बाद में चुनाव आयोग से समय मांगा गया।
उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने उनके प्रतिनिधिमंडल की बात धैर्यपूर्वक सुनी। उन्होंने आयोग के समक्ष अपना पक्ष विस्तार से रखा है और उन्हें उम्मीद है कि आयोग शीघ्र ही इस मामले में अगला कदम उठाएगा। हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि आयोग को कौन-कौन से दस्तावेज सौंपे गए हैं। उनका कहना था कि 22 जून का संगठनात्मक अधिवेशन सभी निर्धारित नियमों का पालन करते हुए आयोजित किया गया था।
ऋतब्रत बनर्जी ने एक बार फिर दावा किया कि उनका गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक, बड़ी संख्या में नगर निगम पार्षद और नगरपालिका पार्षद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संगठनात्मक अधिवेशन के बाद चुनाव आयोग को सूचित करना निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है और उनका गुट यह प्रक्रिया पूरी कर चुका है।
ऋतब्रत गुट पहले ही चुनाव आयोग और कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में दस्तावेज जमा कर पार्टी के नाम, जुड़वां फूल चुनाव चिह्न और संगठनात्मक ढांचे पर अपना दावा पेश कर चुका है। गुट का कहना है कि पार्टी के अधिकांश जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों का समर्थन उसे प्राप्त है, इसलिए उसे ही तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक संगठनात्मक और विधायी इकाई के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने ऋतब्रत गुट के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगी पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं, इसलिए उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश होने का कोई अधिकार नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सौगत राय ने चुनाव आयोग द्वारा ऋतब्रत गुट को समय दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग ने पहले सभी राजनीतिक दलों को स्पष्ट कर दिया था कि केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही आयोग से मिलने का समय मांग सकते हैं। उन्होंने पूछा कि जब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने कोई समय नहीं मांगा, तब पार्टी से निष्कासित व्यक्ति को आयोग ने किस आधार पर पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई का अवसर दिया।
राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग अपने ही नियमों का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की ओर से केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही आयोग से मुलाकात का अनुरोध कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस समूह का एक भी सांसद नहीं है, उसे पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई का अवसर केवल इसलिए मिला क्योंकि उसके पीछे भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का समर्थन है।
सागरिका घोष ने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दल की विधायी इकाई और संगठनात्मक इकाई अलग-अलग होती हैं। केवल विधायी दल के आधार पर किसी पार्टी के विलय, विभाजन या संगठनात्मक नियंत्रण का निर्णय नहीं लिया जा सकता।
अब चुनाव आयोग द्वारा 06 जुलाई को शाम 5:30 बजे तक दोनों पक्षों से जवाब मांगे जाने के बाद इस पूरे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। दोनों गुटों के जवाब मिलने के बाद आयोग संगठनात्मक चुनाव, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं तथा पार्टी पर किए गए दावों और प्रतिदावों की समीक्षा करेगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आयोग इस मामले में आगे क्या निर्णय लेता है।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर