
नई दिल्ली, 20 जुलाई (हि.स.)। गोवा में चल रही ‘नक्शा’ पायलट परियोजना को लेकर फैल रही अफवाहों पर ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने कहा है कि इस परियोजना से किसी भी व्यक्ति के जमीन के कागजात, मालिकाना हक और जमीन की सीमाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सभी मौजूदा भूमि अभिलेख पूरी तरह सुरक्षित हैं।
सरकार के मुताबिक, ‘नक्शा’ परियोजना राष्ट्रीय डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य शहरों की जमीन का डिजिटल मानचित्र तैयार करना, भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक बनाना और शहरी विकास की योजना को बेहतर करना है।
सोमवार को विज्ञप्ति जारी कर विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई जमीन मालिक सर्वे के दौरान मौजूद नहीं है या विदेश में रह रहा है, तब भी उसके कानूनी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। केवल सर्वे के आधार पर कोई पड़ोसी या तीसरा व्यक्ति किसी की जमीन पर दावा नहीं कर सकता। जमीन का स्वामित्व पहले की तरह वैध दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह परियोजना भूमि अधिग्रहण से जुड़ी नहीं है। इसके तहत न तो निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा और न ही इसका उद्देश्य प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाना है। यह केवल जमीन की वर्तमान स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया है। यदि कोई पुराना भूमि विवाद है, तो उसका निपटारा पहले की तरह अदालत या संबंधित प्रशासनिक प्राधिकरण ही करेंगे।
भौतिक सर्वेक्षण पूरा होने के बाद 16 जुलाई से 14 अगस्त 2026 तक रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया चलेगी। इस दौरान संपत्ति मालिक अपने स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों के साथ संबंधित सर्वे एवं भूमि अभिलेख कार्यालय में जाकर रिकॉर्ड की जांच करवा सकेंगे। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी