एआरटी और आईवीएफ सेवाओं पर एनसीडब्ल्यू ने बनाए तीन विशेषज्ञ समूह

21 Jul 2026 19:25:53
राष्ट्रीय महिला आयोग


नई दिल्ली, 21 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) और आईवीएफ सेवाओं से जुड़े नैतिक, कानूनी और चिकित्सकीय पहलुओं की व्यापक समीक्षा के लिए तीन विशेषज्ञ समूहों का गठन किया है। यह निर्णय आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में आयोजित विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक में लिया गया। गठित नैतिकता समूह महिलाओं के प्रजनन अधिकार, सूचित सहमति, निजता, डोनर प्रबंधन और भ्रूण से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करेगा।

एनसीडब्ल्यू के मुताबिक नैतिक समूह

का गठन किया गया है जो महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की सुरक्षा, सहमति, निजता और गोपनीयता, डोनर प्रबंधन, भ्रूण से जुड़े नैतिक मुद्दों का अध्ययन

करेगी। इसके साथ आयोग ने विधायी एवं नियामकीय समूह

का गठन किया है जो एआरटी और आईवीएफ से संबंधित मौजूदा कानूनों की समीक्षा, कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन का आकलन

और आवश्यक कानूनी सुधारों की पहचान करेगी। वहीं, चिकित्सा एवं निवारक समूह

जो क्लीनिकल प्रोटोकॉल की समीक्षा

के साथ मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्ता मानक, चिकित्सा रिकॉर्ड का रखरखाव, अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करेगी।

इस बैठक में न्यायपालिका, चिकित्सा, कानून, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आशा मेनन, सुंदरी नंदा (सेवानिवृत्त आईपीएस), डॉ. अर्चना मजूमदार, डॉ. शिप्रा धर, वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी, डॉ. सर्वेश टंडन, डॉ. नीता सिंह, डॉ. नयना सहस्रबुद्धे, डॉ. रजनीकांत कॉन्ट्रैक्टर और कंचन खट्टर सहित कई विशेषज्ञ शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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