(अपडेट) मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक पारित

21 Jul 2026 18:05:53
मप्र विधानसभा (फाइल फोटो)


भोपाल, 21 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- यूसीसी) विधेयक पारित हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक, हंगामा और नारेबाजी हुई। विपक्ष के तीखे विरोध और वॉकआउट के प्रयासों के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए विधेयक को पास घोषित कर दिया।

विधानसभा में आज मंत्री गौतम टेटवाल ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 पर चर्चा के लिए सदन में प्रस्ताव पेश किया। सदन में प्रस्ताव रखते ही विपक्ष हमलावर हो गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। हालांकि, सरकार ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक शुरू हो गई। मांग नहीं माने जाने पर कांग्रेस विधायक विरोध जताते हुए सदन के बीचो-बीच पहुंच गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। वहीं भाजपा विधायक और मंत्री विधेयक पर तुरंत चर्चा कराकर इसे पास कराने पर अड़े रहे।

सदन में बढ़ते हंगामे और अव्यवस्था को देखते हुए अध्यक्ष तोमर ने कार्यवाही को पहले 10 मिनट और फिर 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने इस बिल को सत्ता पक्ष का राजनीतिक एजेंडा करार दिया। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाया।

भाजपा विधायक सीताराम शर्मा ने यूसीसी पर संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान को सिर पर लेकर घूमती है, संविधान मानने की बात करती है, लेकिन उच्चतम न्यायालय के आदेश को नहीं मानती है।

कांग्रेस के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जो हिंदू की बात करेगा, वही राज करेगा। उन्होंने कहा कि समानता हमारी संस्कृति का मूल है। भगवान की दृष्टि में सभी एक समान हैं, तो इंसानों द्वारा बनाए गए कानून में अलग-अलग व्यवस्था क्यों होनी चाहिए। देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राम से रहीम तक, रविंद्र से रॉबिन तक, अमर से एंथोनी और अकबर तक, देश एक संविधान से चले। उन्होंने दावा किया कि समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी और राज्य गोवा, उत्तराखंड और असम के बाद इस दिशा में कदम बढ़ाने वाले चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समान नागरिक संहिता विधेयक पर प्रदेशवासियों को सुझाव देने के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करती रही है तथा देश की जनता की पीठ में खंजर घोंपने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज के बाद मध्य प्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता लागू होने जा रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों के दांत खाने के और, दिखाने के और हैं। अब कांग्रेस का पाखंड और दोहरा चरित्र नहीं चलेगा। यदि कांग्रेस बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान का रत्तीभर भी सम्मान करती है तो उसे इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए। उनका आरोप था कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति करते हुए हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से काम करती रही है। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान कांग्रेस विधायक आपत्तिजनक के नारे लगाते रहे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के नागरिकों के सामाजिक और धार्मिक संस्कार पहले की तरह जारी रहेंगे। हालांकि, प्रदेश में होने वाले सभी विवाहों का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा। पंजीयन नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि एक पत्नी के रहते हुए दूसरा विवाह और एक पति के रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी।

कांग्रेस के लगातार हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक महिला सशक्तीकरण, सामाजिक समरसता और सामाजिक समानता का कानून है तथा सभी दलों से इसका समर्थन करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ था, लेकिन भोपाल को तत्काल आजाद घोषित नहीं किया गया था और उसे पाकिस्तान से मिलाने की कोशिश की गई थी। ऐसे लोगों को डूब मरना चाहिए।

मुख्यमंत्री के वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधायक आरिफ मसूद से कहा कि यदि वे अपने संशोधन पर चर्चा चाहते हैं तो अपनी सीट पर जाकर अपनी बात रखें। तमाम विरोध और हंगामे के बीच सरकार ने सदन में बहुमत के बल पर यूसीसी बिल को पास करा लिया।

विधानसभा से यूसीसी विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद इसका राजपत्र (गजट) में नोटिफिकेशन जारी होगा। नोटिफिकेशन प्रकाशित होते ही मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू हो जाएगा। सरकार की तैयारी के मुताबिक, इसके जुलाई में ही प्रभावी होने की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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