बच्चों के लिए स्वस्थ खानपान पर आईसीएमआर-एनआईएन की बड़ी पहल, नई सिफारिशें जारी

22 Jul 2026 21:09:53
‘भारत में बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर खान-पान और भोजन के माहौल को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी नीतिगत कदम’ शीर्षक से जारी इस दस्तावेज


नई दिल्ली, 22 जुलाई (हि.स.)। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन ) के नेतृत्व वाले ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ (एलएफओएफ) कंसोर्टियम ने बच्चों और किशोरों में स्वस्थ खानपान को बढ़ावा देने के लिए नीति सिफारिशों वाला दस्तावेज जारी किया है।

‘भारत में बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर खान-पान और भोजन के माहौल को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी नीतिगत कदम’ शीर्षक से जारी इस दस्तावेज में बच्चों के लिए बेहतर खाद्य वातावरण तैयार करने और उनकी खानपान संबंधी आदतों में सुधार के लिए वैज्ञानिक आधार पर सुझाव दिए गए हैं।

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एलएफओएफ प्रसार एवं परामर्श कार्यशाला में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने इस दस्तावेज का विमोचन किया। इस अवसर पर आईसीएमआर - एनआईएन की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) के. श्रीनाथ रेड्डी सहित स्वास्थ्य मंत्रालय, एफएसएसएआई, यूनिसेफ इंडिया और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

नीति दस्तावेज में स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण, पोषण साक्षरता, खाद्य उत्पादों पर फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग, बच्चों को अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों पर नियंत्रण, अधिक वसा, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों पर कर, नमक की खपत में कमी, कम सोडियम वाले नमक के उपयोग, व्यवहार परिवर्तन अभियान और युवाओं की भागीदारी जैसे प्रमुख विषयों पर सिफारिशें की गई हैं।

डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे तथा आहार से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित बहु-क्षेत्रीय नीतियां जरूरी हैं। वहीं, आईसीएमआर-एनआईएन की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य शोध को जनस्वास्थ्य के लिए प्रभावी नीतियों में बदलना है।

कार्यशाला के दौरान एलएफओएफ वेबसाइट, स्कूलों के लिए न्यूट्रिशन एनवायरनमेंट असेसमेंट टूलकिट, खाद्य लेबल समझने के लिए ई-लर्निंग मॉड्यूल तथा वसा, चीनी और नमक पर आधारित शैक्षणिक सामग्री भी जारी की गई। विशेषज्ञों ने बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ खाद्य वातावरण तैयार करने और भविष्य की नीतियों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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