
वांगचुक बोले, प्रधान के इस्तीफा न देने से नुकसान सरकार को
नई दिल्ली, 24 जुलाई (हि.स.)। पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार तड़के 26 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। सरकार ने संसद में नीट प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और शिक्षा सुधार पर विस्तृत चर्चा कराने, हालिया नीट प्रश्नपत्र लीक से जुड़े आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उपयुक्त मुआवजा देने तथा जंतर-मंतर और 20 जुलाई के संसद मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों एवं युवाओं के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। इस पर सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार इस मांग पर फैसला नहीं करती है तो इसका नुकसान छात्रों का नहीं बल्कि स्वयं सरकार का होगा।
सोनम वांगचुक ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर स्थित आंदोलन के समर्थन में 28 जून को आमरण अनशन शुरू किया था। अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर पहले उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
वांगचुक ने देर रात जारी अपने वीडियो संदेश में बताया कि शुक्रवार तड़के केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे। वीडियो में दोनों नेताओं ने पहले उन्हें सरकार का लिखित आश्वासन पढ़कर सुनाया फिर उन्हें तरल पदार्थ पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।
आश्वासन पत्र में लिखा था, “सरकार नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शनकारियों तथा 20 जुलाई को संसद मार्च में भाग लेने वाले लोगों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं करने के प्रति सकारात्मक है। सरकार पहले ही यह आश्वासन दे चुकी है कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या के समाधान और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। इसके अलावा, हालिया नीट प्रश्नपत्र लीक प्रकरण से जुड़े आत्महत्या पीड़ितों के परिजनों को उपयुक्त मुआवजा देने पर भी सरकार सकारात्मक रूप से विचार करेगी।”
सोनम वांगचुक ने कहा कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि केवल मौखिक भरोसे पर वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे और उन्हें लिखित आश्वासन चाहिए। इसी कारण उन्हें दो दिन अतिरिक्त अनशन पर बैठना पड़ा। अंततः सरकार ने लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसद स्वयं उनसे मिलने पहुंचे या हस्ताक्षरयुक्त पत्र भेजकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। सांसदों ने आश्वस्त किया कि संसद में परीक्षा प्रणाली की विफलताओं, प्रश्नपत्र लीक और जवाबदेही तय करने पर विस्तार से चर्चा होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल नीट का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार इस विषय पर उन्हें कोई आश्वासन नहीं दे सकी। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो रास्ते थे या तो वह अनिश्चितकाल तक अनशन जारी रखते और संभवतः उसी में उनकी जान चली जाती या फिर छात्रों के व्यापक हितों को देखते हुए उन मुद्दों पर मिले लिखित आश्वासन को स्वीकार करते जिनका सीधा संबंध छात्रों के भविष्य से है। यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो इसका नुकसान छात्रों को नहीं बल्कि स्वयं सरकार को होगा। यदि सरकार समय रहते यह फैसला कर लेती तो उसका राजनीतिक नुकसान रुक सकता था। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा समय के साथ अपने आप तय हो जाएगा।
सोनम वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना था कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज न हो। उन्होंने कहा कि उन्होंने लद्दाख में देखा है कि किस प्रकार वर्षों तक एफआईआर का बोझ युवाओं का भविष्य प्रभावित करता है। इसलिए छात्रों को कानूनी कार्रवाई से बचाने का लिखित आश्वासन उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और संसद में जवाबदेही पर चर्चा कराने के आश्वासन को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भारत की संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यदि वहां परीक्षा प्रणाली, शिक्षा सुधार तथा जवाबदेही पर गंभीर चर्चा होती है तो यह देश के छात्रों के हित में बड़ा कदम होगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों, अपने समर्थकों और आंदोलन से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त किया।
अनशन समाप्त करते समय उन्होंने कहा कि 26 दिनों के बाद तरल पदार्थ का स्वाद उन्हें बेहद अच्छा लग रहा है, लेकिन उनकी ‘भूख समाप्त नहीं हुई है।’ यह भूख जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की है तथा यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखें और किसी भी प्रकार की हिंसा अथवा असामाजिक तत्वों को आंदोलन का हिस्सा न बनने दें।
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, “भूख का अंत… जवाबदेही की शुरुआत।” सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन समाप्त किया है। संसद में परीक्षा प्रणाली की विफलताओं और जवाबदेही पर चर्चा होगी, नीट प्रश्नपत्र लीक से जुड़े आत्महत्या पीड़ित छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
इस बीच ऐसी जानकारी भी सामने आई है कि सरकार जंतर-मंतर पर आंदोलनरत सीजेपी नेताओं के साथ संविधान क्लब में बातचीत कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, सीजेपी नेतृत्व पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम वीडियो संदेश जारी कर प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रश्नपत्र लीक रोकने और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने से संबंधित मसौदा शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाएगा। प्रधानमंत्री के इस संदेश के कुछ घंटे बाद ही सोनम वांगचुक ने सरकार से मिले लिखित आश्वासन के आधार पर अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर