
गांधीनगर, 25 जुलाई (हि.स.)। गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। शनिवार सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक राज्य के 200 से अधिक तालुकों में 1 मिमी से लेकर लगभग 5 इंच तक बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वलसाड के कपराड़ा में 4.84 इंच और बनासकांठा के ओगाड में 3.86 इंच बारिश हुई।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने नवसारी के बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत सहायता की घोषणा की है। घर-गृहस्थी के नुकसान पर ₹6,800 की सहायता दी जाएगी, जिसमें ₹1,800 तत्काल प्रदान किए जाएंगे। पशुधन के नुकसान पर गाय-भैंस के लिए ₹37,500 और बकरी के लिए ₹22,000 की सहायता मिलेगी।
राजकोट-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर बावला के पास पानी भरने से मार्ग डायवर्ट कर दिया गया है। वहीं अहमदाबाद और सूरत के कई इलाकों में अब भी जलभराव बना हुआ है, जिससे लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।
भारी बारिश के कारण राज्यभर में 42,158 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि 6,367 लोगों का रेस्क्यू किया गया। अब तक बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 8 लोगों की मौत तथा 308 पशुओं के मरने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है।
मौसम विभाग ने बनासकांठा, वाव-थराद सहित 9 जिलों में रेड अलर्ट, अहमदाबाद समेत 17 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और 7 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है।
सूरत में लगातार तीसरे दिन भी कई क्षेत्रों में कमर तक पानी भरा रहा। लोग मनपा की ढोर पकड़ने वाली गाड़ियों और ट्रैक्टरों में बैठकर दफ्तर जाने को मजबूर दिखे। स्थानीय लोगों ने जलनिकासी व्यवस्था को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
अहमदाबाद के बोपल में दो दिनों से कमर तक पानी भरा होने के कारण कई घर जलमग्न हैं। स्थानीय लोग स्वयं नावों के जरिए जरूरतमंदों तक मदद पहुंचा रहे हैं।
पाटण के सांतलपुर में भारी बारिश से कई मवेशियों की मौत हो गई। सुरेंद्रनगर में फंसे 6 लोगों का रात में बोट से रेस्क्यू किया गया, जबकि सांतलपुर में तेज बहाव में फंसे 8 यात्रियों को पुलिस और स्थानीय युवाओं ने सुरक्षित बाहर निकाला। ऊंझा में पेड़ गिरने से एक महिला की मौत हो गई, जबकि वीरपुर में बाढ़ में बह गई कार से 26 घंटे बाद 70 वर्षीय व्यक्ति का शव बरामद हुआ।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) पहुंचकर बारिश की स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों को अगले 24 घंटे तक सतर्क रहने, राहत कार्य तेज करने और पानी उतरते ही सफाई, स्वास्थ्य सेवाएं तथा नुकसान का सर्वे तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए।
राज्य के जलाशयों में फिलहाल 53.14% जल संग्रह है और दक्षिण गुजरात में बारिश का जोर कम होने के साथ अब राहत एवं पुनर्वास कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे