केंद्र से 70 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिली, नहीं तो पश्चिम बंगाल दिवालिया हो जाता : स्वपन दासगुप्ता

25 Jul 2026 19:56:53
स्वपन दासगुप्ता


कोलकाता, 25 जुलाई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने शनिवार को विधानसभा में दावा किया कि मई में भारतीय जनता पार्टी सरकार के सत्ता में आने के बाद से राज्य को केंद्र सरकार से ₹70,000 करोड़ की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि इस सहायता के बिना राज्य की वित्तीय स्थिति बेहद गंभीर हो जाती और कई जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन प्रभावित होता।

विधानसभा में विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार राज्य पर ₹8 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज छोड़कर गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक बजटीय अनुशासन का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई।

सरकारी धन के उपयोग को लेकर तृणमूल कांग्रेस की विधायक सबीना यास्मीन द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए दासगुप्ता ने कहा, यह विनियोग विधेयक है, दुरुपयोग विधेयक नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार को कुछ अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान भी करने होंगे। इनमें सिंगूर में टाटा मोटर्स की प्रस्तावित कार निर्माण परियोजना से जुड़े भूमि विवाद में कंपनी के पक्ष में आए मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के फैसले का मामला भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय को पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईडीसी) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के बाद टाटा मोटर्स ने सिंगूर से अपनी नैनो कार परियोजना हटाकर गुजरात के सानंद में स्थापित कर दी थी, जिसके बाद यह विवाद लंबा खिंचता रहा।

चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल ने भारी उद्योग, पंचायती राज और कानून-व्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में शीर्ष स्थान हासिल किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसी रैंकिंग केंद्र सरकार द्वारा राज्यों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि उन आंकड़ों को सही माना जाए, तो पश्चिम बंगाल कई राज्यों से आगे होना चाहिए था।

दासगुप्ता ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने राज्य में 93 लाख एमएसएमई होने का दावा किया था, जबकि जांच में केवल 99 हजार लघु और मध्यम उद्यम ही संचालित पाए गए। उनके अनुसार यह पूर्ववर्ती सरकार के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़े अंतर को दर्शाता है।

चर्चा के बाद विधानसभा ने विनियोग विधेयक पारित कर दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार को संचित निधि से विभिन्न मदों पर व्यय करने की वैधानिक अनुमति मिल गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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